📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Original: Vyacheslav Argenberg
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कृषि
गोवा के एकमात्र रैमसर स्थल पर मछली पालन से मूल मछलियों का पुनरुद्धार
✍️ The Times of India
🗓 27 अग. 2026, 04:17 AM
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राज्य सरकार ने गोवा के एकमात्र रैमसर स्थल पर मूल मछलियों को पुनर्स्थापित करने के लिए मछली पालन योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य जैव विविधता और स्थानीय आजीविका को सुदृढ़ करना है।
गोवा के पर्यावरण विभाग ने राज्य के एकमात्र रैमसर सूचीबद्ध जलाशय में मूल मछलियों के पुनरुद्धार के लिए मछली पालन परियोजना शुरू की है। इस योजना के तहत नियंत्रित तालाबों में स्वदेशी मछलियों को पाला जाएगा और फिर उन्हें प्राकृतिक जलाशय में छोड़ा जाएगा ताकि उनकी जनसंख्या बढ़े।
अधिकारियों का कहना है कि यह पहल जैव विविधता को पुनर्स्थापित करने और स्थानीय मछुआरों को स्थायी आय प्रदान करने दोनों उद्देश्यों को पूरा करती है। चयनित प्रजातियाँ उस जलाशय में historically पाई जाने वाली हैं, जो पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
परियोजना का वित्त पोषण राज्य सरकार द्वारा किया गया है और इसे गोवा वन विभाग द्वारा अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से निगरानी किया जाएगा। प्रारंभिक आंकड़े दर्शाते हैं कि पायलट क्षेत्रों में मछलियों की गतिविधि में वृद्धि हुई है।
सफलता मिलने पर इस मॉडल को देश के अन्य संवेदनशील जलाशयों में दोहराया जा सकता है, जिससे सामुदायिक‑आधारित जलकृषि संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में सहायक सिद्ध हो सकता है।
अधिकारियों का कहना है कि यह पहल जैव विविधता को पुनर्स्थापित करने और स्थानीय मछुआरों को स्थायी आय प्रदान करने दोनों उद्देश्यों को पूरा करती है। चयनित प्रजातियाँ उस जलाशय में historically पाई जाने वाली हैं, जो पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
परियोजना का वित्त पोषण राज्य सरकार द्वारा किया गया है और इसे गोवा वन विभाग द्वारा अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से निगरानी किया जाएगा। प्रारंभिक आंकड़े दर्शाते हैं कि पायलट क्षेत्रों में मछलियों की गतिविधि में वृद्धि हुई है।
सफलता मिलने पर इस मॉडल को देश के अन्य संवेदनशील जलाशयों में दोहराया जा सकता है, जिससे सामुदायिक‑आधारित जलकृषि संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में सहायक सिद्ध हो सकता है।