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कृषि

ग्वालियर में कम्बाइन हार्वेस्टर पर SMS अनिवार्य, पराली जलाने पर लगेगा भारी जुर्माना

✍️ रिपोर्टर: Pranav Gaur 🗓 25 अक्टू. 2026, 11:04 PM 👁 13
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पराली जलाने पर अंकुश लगाने के लिए ग्वालियर जिले प्रशासन ने कम्बाइन हार्वेस्टर में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) का उपयोग अनिवार्य कर दिया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पर्यावरण मुआवजा वसूले जाने का निर्देश दिया गया है।

ग्वालियर जिले में धान की पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस आदेश के तहत, धान कटाई में उपयोग किए जाने वाले कम्बाइन हार्वेस्टर में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) का उपयोग करना अब अनिवार्य कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने हार्वेस्टर संचालकों को स्पष्ट आगाह किया है कि वे कटाई के समय हार्वेस्टर में SMS अनिवार्य रूप से लगाएं, अन्यथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सहायक कृषि यंत्री कर्मशाला से प्राप्त जानकारी के अनुसार, SMS युक्त कम्बाइन हार्वेस्टर फसल कटाई के साथ-साथ उसके बचे हुए अवशेषों, यानी पराली को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में ही बिखेर देता है। इस प्रक्रिया से न केवल पराली का प्रबंधन होता है, बल्कि खेतों की उर्वरता में भी वृद्धि होती है।

नागरिक ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिशा-निर्देशों के तहत कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती चौहान ने पराली जलाने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पराली जलाना एक दण्डनीय अपराध है और इसके उल्लंघन पर भूमि धारकों से पर्यावरण मुआवजा वसूला जाएगा। दो एकड़ से कम भूमि धारक को 2,500 रुपये, दो से पांच एकड़ के बीच की भूमि धारक को 5,000 रुपये, और पांच एकड़ से अधिक भूमि धारक को 15,000 रुपये प्रति घटना का जुर्माना देना होगा। इस आदेश के पालन के लिए जिला दण्डाधिकारी द्वारा संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारियों की अध्यक्षता में समितियां भी गठित कर दी गई हैं।

जिले के किसानों से अपील की गई है कि वे अपने खेतों में पराली व नरवाई न जलाएं, क्योंकि इससे पर्यावरण को भारी क्षति पहुंचती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पराली जलाने से भूमि में अम्लीयता बढ़ती है, लाभदायक सूक्ष्म जीवाणु मर जाते हैं और भूमि की जलधारण क्षमता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है, जिससे मृदा को अत्यधिक क्षति पहुंचती है।
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