📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / travelwayoflife
मौसम
बढ़हरा, भोजपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 43 सेमी ऊपर, 30 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित
✍️ Amar Ujala · Patna
🗓 25 अग. 2026, 06:37 PM
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बढ़हरा प्रखंड, भोजपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 43 सेमी ऊपर पहुंच गया, जिससे 30 से अधिक गांवों में खेत, ग्रामीण सड़कें डूब गईं और पशु चारे की कमी का खतरा बढ़ा।
बिहार के भोजपुर जिले के बढ़हरा प्रखंड में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 43 सेमी ऊपर पहुंच गया है, जैसा कि राज्य के बाढ़ निगरानी विभाग ने बताया। इस वृद्धि से नदी के किनारे जलमग्न क्षेत्र बन गया है और स्थानीय प्रशासन ने आपातकालीन चेतावनी जारी की है।
प्रखंड के तीस से अधिक गांवों में पानी का स्तर बढ़ा है। खेत‑बधार हो गए हैं, ग्रामीण सड़कों पर पानी जमा हो गया है जिससे लोगों को बाजार और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। साथ ही पशु चारे के भंडार भी जलमग्न हो गए हैं, जिससे पशुपालकों को तत्काल संकट का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय अधिकारियों ने स्थल सर्वेक्षण शुरू कर दिया है और रेत के थैले व अस्थायी आश्रय स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं। बाढ़ का स्तर अभी भी बढ़ रहा है, इसलिए स्थिति में और बिगड़ाव की संभावना बनी हुई है।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने ग्रामीणों से उच्च स्थान पर शरण लेने और जलमग्न सड़कों को पार न करने की अपील की है। राहत एजेंसियां जल के घटने के बाद आपातकालीन भोजन पैकेट और पशु चारा वितरित करने की तैयारी कर रही हैं।
यह घटना बिहार के नदी किनारे स्थित जिलों की बाढ़ से बढ़ती असुरक्षा को उजागर करती है और बेहतर बाढ़‑नियंत्रण बुनियादी ढांचे व समय पर चेतावनी प्रणाली की आवश्यकता को दोहराती है।
प्रखंड के तीस से अधिक गांवों में पानी का स्तर बढ़ा है। खेत‑बधार हो गए हैं, ग्रामीण सड़कों पर पानी जमा हो गया है जिससे लोगों को बाजार और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। साथ ही पशु चारे के भंडार भी जलमग्न हो गए हैं, जिससे पशुपालकों को तत्काल संकट का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय अधिकारियों ने स्थल सर्वेक्षण शुरू कर दिया है और रेत के थैले व अस्थायी आश्रय स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं। बाढ़ का स्तर अभी भी बढ़ रहा है, इसलिए स्थिति में और बिगड़ाव की संभावना बनी हुई है।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने ग्रामीणों से उच्च स्थान पर शरण लेने और जलमग्न सड़कों को पार न करने की अपील की है। राहत एजेंसियां जल के घटने के बाद आपातकालीन भोजन पैकेट और पशु चारा वितरित करने की तैयारी कर रही हैं।
यह घटना बिहार के नदी किनारे स्थित जिलों की बाढ़ से बढ़ती असुरक्षा को उजागर करती है और बेहतर बाढ़‑नियंत्रण बुनियादी ढांचे व समय पर चेतावनी प्रणाली की आवश्यकता को दोहराती है।