📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / travelwayoflife
मौसम
मालदा में गंगा‑फुलहर नदियों का निकटता, राज्य ने कोर्स बदलने की योजना बनाई
✍️ The Times of India
🗓 26 अक्टू. 2026, 06:04 AM
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गंगा और फुलहर नदियों का मालदा में अत्यधिक निकटता से प्रवाह राज्य सरकार को कोर्स बदलने के प्रोजेक्ट को शुरू करने पर मजबूर कर रहा है।
गंगा और फुलहर नदियों का प्रवाह पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एक दूसरे के बहुत करीब आ गया है, जिससे अचानक दोहों में से एक का ओवरटेक हो कर बड़े क्षेत्र में बाढ़ आने का खतरा उत्पन्न हो गया है। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि दोनों नदियों के बीच की दूरी घटने से उच्च जलस्तर के समय में बाढ़ का जोखिम बढ़ गया है।
इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने नदियों के कोर्स को बदलने के लिए एक विशेष परियोजना शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना में ड्रीजिंग, बांधों की मजबूती और आवश्यकतानुसार नई नहर बनाकर गंगा‑फुलहर के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने का काम शामिल होगा। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम मानसून के आगमन से पहले संभावित आपदा को रोकने के लिए तेज़ी से लागू किया जाएगा।
पश्चिम बंगाल जल संसाधन विभाग और वरिष्ठ सिविल इंजीनियरों के साथ परामर्श के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है ताकि नदियों के किनारे स्थित कृषि भूमि और बस्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। फंडिंग और विस्तृत डिजाइन कुछ हफ्तों में तय किया जाएगा, और कार्य शुरू होने की संभावना मानसून के चरम से पहले होगी।
मालदा के निवासियों को सतर्क रहने और परियोजना के दौरान जारी किए जा सकने वाले किसी भी निकासी या सुरक्षा उपायों में सहयोग करने की सलाह दी गई है। राज्य सरकार ने समय‑समय पर कार्य की प्रगति और प्रभाव के बारे में जनता को अपडेट करने का वचन दिया है।
यह कदम राज्य के बाढ़‑प्रवण क्षेत्रों में नदियों के प्रबंधन की बढ़ती चुनौतियों को दर्शाता है, जहाँ बदलते जलमार्गों को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय बुनियादी ढाँचा आवश्यक हो गया है।
इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने नदियों के कोर्स को बदलने के लिए एक विशेष परियोजना शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना में ड्रीजिंग, बांधों की मजबूती और आवश्यकतानुसार नई नहर बनाकर गंगा‑फुलहर के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने का काम शामिल होगा। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम मानसून के आगमन से पहले संभावित आपदा को रोकने के लिए तेज़ी से लागू किया जाएगा।
पश्चिम बंगाल जल संसाधन विभाग और वरिष्ठ सिविल इंजीनियरों के साथ परामर्श के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है ताकि नदियों के किनारे स्थित कृषि भूमि और बस्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। फंडिंग और विस्तृत डिजाइन कुछ हफ्तों में तय किया जाएगा, और कार्य शुरू होने की संभावना मानसून के चरम से पहले होगी।
मालदा के निवासियों को सतर्क रहने और परियोजना के दौरान जारी किए जा सकने वाले किसी भी निकासी या सुरक्षा उपायों में सहयोग करने की सलाह दी गई है। राज्य सरकार ने समय‑समय पर कार्य की प्रगति और प्रभाव के बारे में जनता को अपडेट करने का वचन दिया है।
यह कदम राज्य के बाढ़‑प्रवण क्षेत्रों में नदियों के प्रबंधन की बढ़ती चुनौतियों को दर्शाता है, जहाँ बदलते जलमार्गों को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय बुनियादी ढाँचा आवश्यक हो गया है।