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गुना में सोशल मीडिया पर भ्रामक और भड़काऊ सामग्री के प्रसार पर कलेक्टर ने जारी किया प्रतिबंधात्मक आदेश
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए गुना के कलेक्टर ने सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाएं भड़काने वाली और सरकारी योजनाओं से जुड़ी गलत जानकारी फैलाने पर रोक लगाई है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत कार्रवाई होगी।
गुना जिले में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री किशोर कुमार कन्याल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। पुलिस अधीक्षक के प्रतिवेदन के आधार पर लिया गया यह निर्णय 5 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है और यदि वापस नहीं लिया जाता, तो 4 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। प्रशासन ने बताया कि वर्तमान में WhatsApp, Facebook और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर भ्रामक सूचनाओं, फोटो, ऑडियो और वीडियो का प्रसार लोक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर रहा है।
आदेश के तहत किसी भी व्यक्ति को सोशल मीडिया का उपयोग करके धार्मिक, सामाजिक या जातिगत भावनाओं को भड़काने वाले संदेशों, आपत्तिजनक सामग्री या हिंसा फैलाने वाले आह्वानों को पोस्ट, शेयर या फॉरवर्ड करने पर सख्ती से रोक लगाई गई है। इसमें कमेंट, लाइक या शेयर करने पर भी प्रतिबंध है। साथ ही, सोशल मीडिया ग्रुप एडमिन की जिम्मेदारी भी तय की गई है, जिन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके ग्रुप में कोई भी विद्वेष फैलाने वाली सामग्री प्रसारित न हो।
प्रशासन ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, कार्यक्रमों या शासकीय आदेशों से संबंधित भ्रामक, असत्य या अपुष्ट जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा करने पर भी प्रतिबंध लगाया है। प्रशासन का कहना है कि ऐसी गलत जानकारी से आमजन में भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हो सकती है। नागरिकों से अपील की गई है कि सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी साझा करते समय केवल अधिकृत और सत्यापित शासकीय स्रोतों पर ही भरोसा करें।
इसके अलावा, गुना जिले में संचालित साइबर कैफे संचालकों के लिए भी विशेष नियम बनाए गए हैं। संचालकों को अनजान लोगों को पहचान-पत्र के बिना कैफे का उपयोग करने नहीं देना होगा और सभी उपयोगकर्ताओं का नाम, पता, दूरभाष नंबर सहित रजिस्टर रखना अनिवार्य होगा। कैफे में वेब कैमरा लगाना भी जरूरी है, जिससे आगंतुकों की फोटो का रिकॉर्ड कम से कम छह माह तक सुरक्षित रखा जा सके। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 223 और अन्य लागू कानूनों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आदेश के तहत किसी भी व्यक्ति को सोशल मीडिया का उपयोग करके धार्मिक, सामाजिक या जातिगत भावनाओं को भड़काने वाले संदेशों, आपत्तिजनक सामग्री या हिंसा फैलाने वाले आह्वानों को पोस्ट, शेयर या फॉरवर्ड करने पर सख्ती से रोक लगाई गई है। इसमें कमेंट, लाइक या शेयर करने पर भी प्रतिबंध है। साथ ही, सोशल मीडिया ग्रुप एडमिन की जिम्मेदारी भी तय की गई है, जिन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके ग्रुप में कोई भी विद्वेष फैलाने वाली सामग्री प्रसारित न हो।
प्रशासन ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, कार्यक्रमों या शासकीय आदेशों से संबंधित भ्रामक, असत्य या अपुष्ट जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा करने पर भी प्रतिबंध लगाया है। प्रशासन का कहना है कि ऐसी गलत जानकारी से आमजन में भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हो सकती है। नागरिकों से अपील की गई है कि सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी साझा करते समय केवल अधिकृत और सत्यापित शासकीय स्रोतों पर ही भरोसा करें।
इसके अलावा, गुना जिले में संचालित साइबर कैफे संचालकों के लिए भी विशेष नियम बनाए गए हैं। संचालकों को अनजान लोगों को पहचान-पत्र के बिना कैफे का उपयोग करने नहीं देना होगा और सभी उपयोगकर्ताओं का नाम, पता, दूरभाष नंबर सहित रजिस्टर रखना अनिवार्य होगा। कैफे में वेब कैमरा लगाना भी जरूरी है, जिससे आगंतुकों की फोटो का रिकॉर्ड कम से कम छह माह तक सुरक्षित रखा जा सके। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 223 और अन्य लागू कानूनों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।