📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Post of India
बिज़नेस
फ़ोरम ने हेरक से समानांतर पावर वितरण बोली पर याचिका अस्वीकार करने की मांग की
✍️ Hindustan Times
🗓 23 जुल. 2026, 09:18 AM
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एक फ़ोरम ने हेरक से समानांतर पावर वितरण बोली पर याचिका अस्वीकार करने की अपील की, नियामक अनुपालन की चिंताओं को दर्शाते हुए।
उद्योग हितधारकों के एक गठबंधन ने हेरक (हैदराबाद विद्युत नियामक आयोग) से समानांतर पावर वितरण बोली पर याचिका अस्वीकार करने का अनुरोध किया है। यह याचिका स्थानीय पावर वितरकों के एक समूह द्वारा दायर की गई है, जो दावा करते हैं कि यह बोली प्रक्रिया मौजूदा नियामक मानदंडों का उल्लंघन करती है और बाज़ार में विकृतियाँ पैदा कर सकती है।
फ़ोरम का तर्क है कि यह बोली पारदर्शिता से वंचित है और राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति के अनुरूप नहीं है। वे यह भी कहते हैं कि इस बोली को मंजूरी देने से पावर ग्रिड की स्थिरता पर असर पड़ेगा और उपभोक्ता दरों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
हेरक ने अभी तक निर्णय नहीं लिया है। आयोग को याचिका और फ़ोरम की आपत्तियों की समीक्षा करनी है और फिर अपनी स्थिति घोषित करनी है। हितधारक उम्मीद करते हैं कि इस निर्णय से भविष्य की पावर वितरण पहलों के लिए मिसाल कायम होगी।
यह बहस समानांतर पावर वितरण योजनाओं के नियमन पर व्यापक चिंताओं को दर्शाती है, जो एक ही क्षेत्र में कई इकाइयों को बिजली आपूर्ति करने की अनुमति देती हैं। समर्थक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का दावा करते हैं, जबकि आलोचक नियामक छिद्रों के बारे में चेतावनी देते हैं।
फ़ोरम की अपील राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में सख्त निगरानी बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करती है, खासकर जब हैदराबाद विकास और उपभोक्ता संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है।
फ़ोरम का तर्क है कि यह बोली पारदर्शिता से वंचित है और राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति के अनुरूप नहीं है। वे यह भी कहते हैं कि इस बोली को मंजूरी देने से पावर ग्रिड की स्थिरता पर असर पड़ेगा और उपभोक्ता दरों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
हेरक ने अभी तक निर्णय नहीं लिया है। आयोग को याचिका और फ़ोरम की आपत्तियों की समीक्षा करनी है और फिर अपनी स्थिति घोषित करनी है। हितधारक उम्मीद करते हैं कि इस निर्णय से भविष्य की पावर वितरण पहलों के लिए मिसाल कायम होगी।
यह बहस समानांतर पावर वितरण योजनाओं के नियमन पर व्यापक चिंताओं को दर्शाती है, जो एक ही क्षेत्र में कई इकाइयों को बिजली आपूर्ति करने की अनुमति देती हैं। समर्थक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का दावा करते हैं, जबकि आलोचक नियामक छिद्रों के बारे में चेतावनी देते हैं।
फ़ोरम की अपील राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में सख्त निगरानी बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करती है, खासकर जब हैदराबाद विकास और उपभोक्ता संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है।