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21 अग. 2026
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पूर्व RBI अधिकारी ने कहा: UPI के लिए स्थायी राजस्व मॉडल जरूरी, बड़े लेन‑देन पर MDR उचित
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / National Payments Corporation of India
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पूर्व RBI अधिकारी ने कहा: UPI के लिए स्थायी राजस्व मॉडल जरूरी, बड़े लेन‑देन पर MDR उचित

✍️ Sikkimexpress 🗓 21 अग. 2026, 03:34 AM 👁 6
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एक पूर्व RBI अधिकारी ने कहा कि UPI को स्थायी राजस्व मॉडल अपनाना चाहिए और बड़े लेन‑देन पर MDR लागू करना उचित है।

नई दिल्ली – एक पूर्व भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अधिकारी ने यूनिफ़ाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) के लिए दीर्घकालिक राजस्व ढाँचा आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि शून्य शुल्क मॉडल ने डिजिटल भुगतान को तेज़ किया है, परन्तु यह प्रणाली के लिए वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं है।

अधिकारी ने सुझाव दिया कि उच्च मूल्य वाले लेन‑देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जाए, जिससे आवश्यक फंड जुटाया जा सके और रोज़मर्रा के उपयोगकर्ताओं पर असर कम रहे। उन्होंने बताया कि बड़े लेन‑देन कुल वॉल्यूम का छोटा हिस्सा हैं, इसलिए लक्षित MDR का प्रभाव सीमित रहेगा, जबकि बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को समर्थन मिलेगा।

उद्योग विशेषज्ञों ने UPI को बिना उसकी समावेशी भावना को नुकसान पहुँचाए मोनेटाइज़ करने पर बहस की है। RBI की पहले की MDR पर चर्चा रुक गई थी, परन्तु इस पूर्व अधिकारी की टिप्पणी नीति चर्चाओं को फिर से गति दे सकती है, क्योंकि प्लेटफ़ॉर्म प्रतिदिन अरबों रुपये का लेन‑देन संभाल रहा है।

यदि यह कदम अपनाया गया, तो यह बैंकों के लिए स्थायी राजस्व स्रोत बन सकता है, नवाचार को प्रोत्साहित करेगा और आने वाले वर्षों में UPI की स्केलेबिलिटी सुनिश्चित करेगा।
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