📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Information and Broadcasting
अपराध
पूर्व पंजाब मुख्य सचिव अनुराग वर्मा ने सेंटेक सिटी मामले में ईडी समन को दोबारा नज़रअंदाज़ किया
✍️ News18
🗓 07 सित. 2026, 11:48 PM
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पूर्व पंजाब मुख्य सचिव अनुराग वर्मा ने सेंटेक सिटी जांच के तहत ईडी के समन को दोबारा नजरअंदाज़ किया।
अनुराग वर्मा, जिन्होंने 2022 तक पंजाब के मुख्य सचिव के रूप में कार्य किया, ने सेंटेक सिटी मामले से जुड़ी ईडी की अदालत‑आधारित समन को फिर से नजरअंदाज़ किया है। यह समन दिल्ली के सेंटेक सिटी कॉम्प्लेक्स से जुड़े संभावित मनी‑लॉन्डरिंग मामलों की जांच के हिस्से के रूप में जारी किया गया था।
ईडी ने इस हफ्ते प्रारम्भ में ही वर्मा को उपस्थित होने का नोटिस भेजा, जिसमें उनसे वित्तीय लेन‑देनों के बारे में पूछताछ करने की इच्छा जताई गई थी। स्रोतों के अनुसार, पूर्व अधिकारी ने नोटिस का जवाब नहीं दिया, जिससे एजेंसी ने उनकी अनुपस्थिति दर्ज कर ली।
ईडी के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि जांच अभी भी सक्रिय है और यदि वर्मा समन को बार‑बार टालते रहे तो आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है और वर्मा के कानूनी प्रतिनिधियों ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
सेंटेक सिटी केस ने बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और वरिष्ठ अधिकारियों की संभावित भागीदारी को लेकर व्यापक मीडिया ध्यान आकर्षित किया है। अधिकारियों ने पारदर्शी समाधान के लिए जांच एजेंसियों के सहयोग को आवश्यक बताया है।
यह घटना पूर्व उच्च‑पदस्थ अधिकारियों के खिलाफ वित्तीय अपराध जांच में बढ़ते दबाव को दर्शाती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ईडी पद की परवाह किए बिना जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
ईडी ने इस हफ्ते प्रारम्भ में ही वर्मा को उपस्थित होने का नोटिस भेजा, जिसमें उनसे वित्तीय लेन‑देनों के बारे में पूछताछ करने की इच्छा जताई गई थी। स्रोतों के अनुसार, पूर्व अधिकारी ने नोटिस का जवाब नहीं दिया, जिससे एजेंसी ने उनकी अनुपस्थिति दर्ज कर ली।
ईडी के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि जांच अभी भी सक्रिय है और यदि वर्मा समन को बार‑बार टालते रहे तो आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है और वर्मा के कानूनी प्रतिनिधियों ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
सेंटेक सिटी केस ने बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और वरिष्ठ अधिकारियों की संभावित भागीदारी को लेकर व्यापक मीडिया ध्यान आकर्षित किया है। अधिकारियों ने पारदर्शी समाधान के लिए जांच एजेंसियों के सहयोग को आवश्यक बताया है।
यह घटना पूर्व उच्च‑पदस्थ अधिकारियों के खिलाफ वित्तीय अपराध जांच में बढ़ते दबाव को दर्शाती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ईडी पद की परवाह किए बिना जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।