📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Satdeep Gill
कृषि
हैदराबाद में पड़ी धान को तराजू से पहले मिलों तक ले जाने के आदेश को रोकने की किसान संघ ने कोर्ट में याचिका दायर की
✍️ The Times of India
🗓 10 अक्टू. 2026, 03:37 AM
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हैदराबाद में एक किसान संघ ने राज्य सरकार के उस आदेश को रोकने की मांग की है, जिसके तहत धान को तराजू पर तौलने से पहले मिलों तक ले जाया जा सकता है।
हैदराबाद सरकार ने हाल ही में एक आदेश जारी किया, जिससे धान को आधिकारिक तराजू पर तौलने से पहले मिलों तक ले जाया जा सके। इस कदम को प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से बताया गया, परंतु एक प्रमुख किसान संघ ने इसे तीखी आलोचना का सामना किया है, क्योंकि वह मानता है कि तौलने के चरण को छोड़ने से किसानों को संभावित नुकसान हो सकता है और मूल्य पारदर्शिता कम हो सकती है।
किसान संघ ने हैदराबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें आदेश पर तत्काल रोक की मांग की गई है। याचिका में संघ ने इस बात को उजागर किया कि धान को पहले मिलों तक ले जाने से वजन रिकॉर्ड में हेरफेर की संभावना बढ़ सकती है, जिससे किसानों को मिलने वाले भुगतान पर असर पड़ सकता है।
संघ के कानूनी प्रतिनिधियों ने न्यायालय से आदेश के व्यापक प्रभाव पर विचार करने की अपील की, यह बताते हुए कि सटीक तौलना निष्पक्ष बाजार लेन‑देन का मूल आधार है। याचिका में एक अस्थायी निषेधाज्ञा की मांग की गई है, जब तक आदेश के निहितार्थों की विस्तृत समीक्षा नहीं हो जाती।
राज्य प्रशासन ने अभी तक इस याचिका पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह मामला आने वाले दिनों में सुनवाई के लिए निर्धारित है, और सभी पक्ष एक न्यायिक निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो हैदराबाद में धान के प्रबंधन को प्रभावित कर सकता है।
किसान संघ ने हैदराबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें आदेश पर तत्काल रोक की मांग की गई है। याचिका में संघ ने इस बात को उजागर किया कि धान को पहले मिलों तक ले जाने से वजन रिकॉर्ड में हेरफेर की संभावना बढ़ सकती है, जिससे किसानों को मिलने वाले भुगतान पर असर पड़ सकता है।
संघ के कानूनी प्रतिनिधियों ने न्यायालय से आदेश के व्यापक प्रभाव पर विचार करने की अपील की, यह बताते हुए कि सटीक तौलना निष्पक्ष बाजार लेन‑देन का मूल आधार है। याचिका में एक अस्थायी निषेधाज्ञा की मांग की गई है, जब तक आदेश के निहितार्थों की विस्तृत समीक्षा नहीं हो जाती।
राज्य प्रशासन ने अभी तक इस याचिका पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह मामला आने वाले दिनों में सुनवाई के लिए निर्धारित है, और सभी पक्ष एक न्यायिक निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो हैदराबाद में धान के प्रबंधन को प्रभावित कर सकता है।