📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Goodcitizen0001
वायरल
सत्यापन: सीजेपी विरोध में सीएम विजय और सनीता विलियम्स के वीडियो भ्रमित करने वाले
✍️ India Today
🗓 20 जुल. 2026, 08:34 PM
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ऑनलाइन प्रसारित वीडियो जो दिखाते हैं कि सीएम विजय और अभिनेत्री सनीता विलियम्स सीजेपी विरोध में हैं, उन्हें अलग घटनाओं के फुटेज के रूप में खारिज कर दिया गया है। तथ्य‑जांचने वाले स्रोतों ने पुष्टि की कि ये क्लिप अलग-अलग कार्यक्रमों और समय पर लिए गए थे।
सामाजिक मीडिया पर प्रसारित वीडियो, जिनमें मुख्य मंत्री विजय और अभिनेत्री सनीता विलियम्स को सीजेपी विरोध में दिखाया गया है, को अलग-अलग घटनाओं के फुटेज के रूप में सत्यापित किया गया है। स्वतंत्र तथ्य‑जांच टीमों ने टाइमस्टैम्प, स्थान मेटाडेटा और दृश्य संकेतों का विश्लेषण किया, और पाया कि ये क्लिप अलग-अलग कार्यक्रमों में लिए गए थे।
ये वीडियो पहले एक अनाम उपयोगकर्ता द्वारा एक लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म पर साझा किए गए थे, और जल्दी ही राजनीतिक टिप्पणीकारों के बीच चर्चा का विषय बन गए। हालांकि, सीजेपी रैली के आधिकारिक फुटेज के साथ विस्तृत तुलना में भीड़ की संरचना और दोनों व्यक्तियों की उपस्थिति में असंगतियाँ पाई गईं।
तथ्य‑जांचकर्ताओं ने एक सार्वजनिक बयान जारी किया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि CM विजय का फुटेज एक अलग सार्वजनिक कार्यक्रम में लिया गया था, जबकि सनीता विलियम्स का क्लिप एक फ़िल्म प्रीमियर पर लिया गया था। दोनों वीडियो को वायरल पोस्ट द्वारा गलत तरीके से विरोध से जोड़ा गया था।
राजनीतिक विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि ऐसी गलत सूचना सार्वजनिक भावना को भड़काने और सार्वजनिक अधिकारियों पर विश्वास को कमजोर करने का कारण बन सकती है। तथ्य‑जांच संगठन ने दर्शकों को आग्रह किया है कि वे साझा करने से पहले स्रोतों की पुष्टि करें।
ये वीडियो पहले एक अनाम उपयोगकर्ता द्वारा एक लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म पर साझा किए गए थे, और जल्दी ही राजनीतिक टिप्पणीकारों के बीच चर्चा का विषय बन गए। हालांकि, सीजेपी रैली के आधिकारिक फुटेज के साथ विस्तृत तुलना में भीड़ की संरचना और दोनों व्यक्तियों की उपस्थिति में असंगतियाँ पाई गईं।
तथ्य‑जांचकर्ताओं ने एक सार्वजनिक बयान जारी किया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि CM विजय का फुटेज एक अलग सार्वजनिक कार्यक्रम में लिया गया था, जबकि सनीता विलियम्स का क्लिप एक फ़िल्म प्रीमियर पर लिया गया था। दोनों वीडियो को वायरल पोस्ट द्वारा गलत तरीके से विरोध से जोड़ा गया था।
राजनीतिक विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि ऐसी गलत सूचना सार्वजनिक भावना को भड़काने और सार्वजनिक अधिकारियों पर विश्वास को कमजोर करने का कारण बन सकती है। तथ्य‑जांच संगठन ने दर्शकों को आग्रह किया है कि वे साझा करने से पहले स्रोतों की पुष्टि करें।