📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sudsahab
स्थानीय
खनन‑ग्रस्त हरियाणा क्षेत्रों को अरावली पैनल के दौरे से बाहर रखा, विशेषज्ञों का कहना
✍️ The Times of India
🗓 26 अग. 2026, 03:33 AM
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पर्यावरण विशेषज्ञों का आरोप है कि अरावली पैनल की हालिया साइट यात्रा में हरियाणा के खनन‑प्रभावित क्षेत्रों को बाहर रखा गया, जिससे मूल्यांकन की पूर्णता पर सवाल उठते हैं।
अरावली पैनल, जो अरावली पर्वत श्रृंखला में पर्यावरणीय क्षति का मूल्यांकन करने के लिए गठित किया गया है, ने हाल ही में एक फील्ड यात्रा की। विशेषज्ञों के अनुसार इस दौरे में हरियाणा के कई ऐसे जिलों को बाहर रखा गया, जहाँ अवैध खनन से गंभीर नुकसान हुआ है। पैनल ने पड़ोसी राज्यों के कुछ स्थल देखे, पर हरियाणा के खनन‑ग्रस्त क्षेत्रों को न शामिल करना मूल्यांकन की पूर्णता पर सवाल उठाता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि इन क्षेत्रों में पहाड़ी क्षरण, वन आवरण में कमी और भूजल स्तर में गिरावट जैसी समस्याएँ प्रमुख हैं, जो पैनल के कार्यक्षेत्र में आती हैं। बिना स्थल‑पर निरीक्षण के कोई भी पुनर्स्थापना योजना अधूरी रहेगी।
पैनल के समय‑सारिणी को लॉजिस्टिक कारणों से तैयार किया गया था, पर पर्यावरण संगठनों ने अधिकारियों से अनुरोध किया है कि हरियाणा के प्रभावित जिलों को जल्द से जल्द दौरे में शामिल किया जाए। वे मानते हैं कि सभी खनन‑प्रभावित क्षेत्रों की जाँच ही प्रभावी नीति निर्माण और पुनर्स्थापना कार्यों को संभव बनाएगी।
यह मुद्दा अब राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है, जहाँ सभी प्रभावित क्षेत्रों को सम्मिलित करने के लिए पैनल के पुनः‑निर्धारित कार्यक्रम की मांग की जा रही है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि इन क्षेत्रों में पहाड़ी क्षरण, वन आवरण में कमी और भूजल स्तर में गिरावट जैसी समस्याएँ प्रमुख हैं, जो पैनल के कार्यक्षेत्र में आती हैं। बिना स्थल‑पर निरीक्षण के कोई भी पुनर्स्थापना योजना अधूरी रहेगी।
पैनल के समय‑सारिणी को लॉजिस्टिक कारणों से तैयार किया गया था, पर पर्यावरण संगठनों ने अधिकारियों से अनुरोध किया है कि हरियाणा के प्रभावित जिलों को जल्द से जल्द दौरे में शामिल किया जाए। वे मानते हैं कि सभी खनन‑प्रभावित क्षेत्रों की जाँच ही प्रभावी नीति निर्माण और पुनर्स्थापना कार्यों को संभव बनाएगी।
यह मुद्दा अब राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है, जहाँ सभी प्रभावित क्षेत्रों को सम्मिलित करने के लिए पैनल के पुनः‑निर्धारित कार्यक्रम की मांग की जा रही है।