📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Brendonmotom
राजनीति
पूर्व एटीटीएफ प्रमुख रंजीत देब्बरमा ने अतीत पर खेद जताया, नई ग्रेटर टिप्रालैंड दृष्टि पेश की
✍️ TRIPURAINFO
🗓 25 अग. 2026, 12:03 PM
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पूर्व एटीटीएफ नेता रंजीत देब्बरमा ने अपने सशस्त्र अतीत पर खेद जताते हुए ‘ग्रेटर टिप्रालैंड’ का नया विचार प्रस्तुत किया।
पूर्व एटीटीएफ (ऑल ट्रिपुरा टाइगर फोर्स) के पूर्व प्रमुख रंजीत देब्बरमा ने अपनी सशस्त्र गतिविधियों के बारे में खुलकर बात की। एक हालिया साक्षात्कार में उन्होंने संगठन से जुड़े हिंसक घटनाओं को स्वीकार किया और कहा कि वह अब उस अवधि को गहरा खेद के साथ देखता है।
देब्बरमा ने बताया कि उनका पछतावा आम नागरिकों पर पड़े प्रभाव से उत्पन्न हुआ है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि परिवारों और समुदायों को हुए नुकसान ने उनके मन में भारी बोझ डाल दिया, जिससे उनका दृष्टिकोण बदल गया।
राजनीतिक दृष्टिकोण से, देब्बरमा ने "ग्रेटर टिप्रालैंड" की नई व्याख्या पेश की। उन्होंने तर्क दिया कि यह विचार अलगाववादी भाषा से हटकर समावेशी विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और संवैधानिक साधनों के माध्यम से जनजातीय मांगों को सुलझाने पर केंद्रित होना चाहिए।
विश्लेषकों का मानना है कि एक पूर्व उग्रवादी नेता की यह सार्वजनिक परिवर्तन त्रिपुरा में जनजातीय स्वायत्तता और क्षेत्रीय स्थिरता पर चल रही चर्चाओं को प्रभावित कर सकता है।
देब्बरमा ने बताया कि उनका पछतावा आम नागरिकों पर पड़े प्रभाव से उत्पन्न हुआ है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि परिवारों और समुदायों को हुए नुकसान ने उनके मन में भारी बोझ डाल दिया, जिससे उनका दृष्टिकोण बदल गया।
राजनीतिक दृष्टिकोण से, देब्बरमा ने "ग्रेटर टिप्रालैंड" की नई व्याख्या पेश की। उन्होंने तर्क दिया कि यह विचार अलगाववादी भाषा से हटकर समावेशी विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और संवैधानिक साधनों के माध्यम से जनजातीय मांगों को सुलझाने पर केंद्रित होना चाहिए।
विश्लेषकों का मानना है कि एक पूर्व उग्रवादी नेता की यह सार्वजनिक परिवर्तन त्रिपुरा में जनजातीय स्वायत्तता और क्षेत्रीय स्थिरता पर चल रही चर्चाओं को प्रभावित कर सकता है।