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एटा में आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद का दौरा: विपक्षी एकता और निष्पक्ष चुनाव की मांग
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आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद एटा में पहुंचे और विपक्षी एकता, EVM के बदले बैलेट पेपर, आरक्षण कटौती, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं पर बल देते हुए सरकार पर आलोचना की।
एटा, उत्तर प्रदेश – आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद एटा पहुंचे और प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश एवं देश के कई ज्वलंत मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखी।
उन्होंने विपक्षी एकता पर जोर देते हुए कहा कि भाजपा को हराने के लिए सभी विपक्षी दलों को अपना अहंकार छोड़कर एक मंच पर आना होगा और गठबंधन के दरवाजे आज भी खुले हैं। साथ ही, उन्होंने एक बार फिर ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई, यह कहते हुए कि निष्पक्ष चुनाव के लिए यह आवश्यक है।
आज़ाद ने दलित, पिछड़ा और आदिवासी समाज के आरक्षण तथा छात्रवृत्ति में हो रही कटौती पर सरकार को घेरा और युवाओं के भविष्य को अंधेरे में डालने का आरोप लगाया। इसके अलावा, बेरोजगारी, भर्तियों में धांधली, किसानों की MSP और कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार पर लगातार आलोचना की।
साक्षात्कार के दौरान उन्होंने पूर्व IAS दिव्या मित्तल को ‘अच्छी और विद्वान अधिकारी’ कहा और यदि उन्हें मदद की जरूरत हो तो उनके दरवाजे हमेशा खुले रहने का आश्वासन दिया। अंत में, उन्होंने बहुजन समाज और वंचित वर्गों के हक‑अधिकार की लड़ाई को सड़क से लेकर संसद तक मजबूती से लड़ते रहने का संकल्प लिया।
उन्होंने विपक्षी एकता पर जोर देते हुए कहा कि भाजपा को हराने के लिए सभी विपक्षी दलों को अपना अहंकार छोड़कर एक मंच पर आना होगा और गठबंधन के दरवाजे आज भी खुले हैं। साथ ही, उन्होंने एक बार फिर ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई, यह कहते हुए कि निष्पक्ष चुनाव के लिए यह आवश्यक है।
आज़ाद ने दलित, पिछड़ा और आदिवासी समाज के आरक्षण तथा छात्रवृत्ति में हो रही कटौती पर सरकार को घेरा और युवाओं के भविष्य को अंधेरे में डालने का आरोप लगाया। इसके अलावा, बेरोजगारी, भर्तियों में धांधली, किसानों की MSP और कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार पर लगातार आलोचना की।
साक्षात्कार के दौरान उन्होंने पूर्व IAS दिव्या मित्तल को ‘अच्छी और विद्वान अधिकारी’ कहा और यदि उन्हें मदद की जरूरत हो तो उनके दरवाजे हमेशा खुले रहने का आश्वासन दिया। अंत में, उन्होंने बहुजन समाज और वंचित वर्गों के हक‑अधिकार की लड़ाई को सड़क से लेकर संसद तक मजबूती से लड़ते रहने का संकल्प लिया।