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31 अक्टू. 2026•
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स्वास्थ्य

एम्स पटना में विश्व स्ट्रोक दिवस स्पार्क 2026का आयोजन

✍️ रिपोर्टर: Awanish Kumar 🗓 31 अक्टू. 2026, 11:22 AM 👁 17
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पटना एम्स में स्ट्रोक के त्वरित उपचार के लिए 10बेड कि व्यवस्था विकसितकरने पर जोर

एम्स पटना से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट

एम्स पटना में विश्व स्ट्रोक दिवस पर स्पार्क 2026’ का आयोजन

स्ट्रोक के त्वरित उपचार के लिए 10 बेड की व्यवस्था विकसित करने पर जोर, समर्पित स्ट्रोक सेंटर स्थापित करने की पहल

विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर एम्स पटना के न्यूरोलॉजी विभाग‘स्पार्क 2026’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जागरूकता अभियान के साथ बहुविषयक सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। ‘फर्स्ट कॉल से रिकवरी तक: स्ट्रोक प्रबंधन की बहुविषयक कार्यप्रणाली’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में स्ट्रोक की शीघ्र पहचान, आधुनिक उपचार, पुनर्वास और मरीजों की समग्र देखभाल पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में आईजीआईएमएस, पटना के पूर्व निदेशक प्रो. (डॉ.) ए. के. सिंह उपस्थित रहे। इस अवसर पर डीन (एकेडमिक्स) प्रो. (डॉ.) पूनम प्रसाद भदानी, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह तथा डीन (स्टूडेंट अफेयर्स) प्रो. (डॉ.) रुचि सिन्हा भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम का आयोजन न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार राय के नेतृत्व में किया गया।
अपने संबोधन में प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने एम्स पटना में स्ट्रोक मरीजों की देखभाल के लिए कम से कम 10 बेड की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने ‘टाइम इज ब्रेन’ की अवधारणा को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि स्ट्रोक के उपचार में प्रत्येक मिनट कीमती होता है। समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से मस्तिष्क को होने वाली क्षति और स्थायी विकलांगता के खतरे को कम किया जा सकता है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. (डॉ.) ए. के. सिंह ने स्ट्रोक की रोकथाम के लिए शुरुआती स्तर पर जोखिम कारकों की पहचान, नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर बल दिया। उन्होंने एम्स पटना को स्ट्रोक प्रबंधन के क्षेत्र में एक आदर्श केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।
डीन (एकेडमिक्स) प्रो. (डॉ.) पूनम प्रसाद भदानी ने महिलाओं के स्वास्थ्य और संतुलित पोषण को स्ट्रोक की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण बताया। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह ने तनाव प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं, डीन (स्टूडेंट अफेयर्स) प्रो. (डॉ.) रुचि सिन्हा ने जनजागरूकता कार्यक्रमों को स्ट्रोक की रोकथाम एवं समय पर उपचार के लिए उपयोगी बताया।
न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार राय ने स्ट्रोक के मरीजों के लिए एम्स पटना में समर्पित स्ट्रोक सेंटर स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने युवाओं में धूम्रपान एवं नशीले पदार्थों के सेवन को स्ट्रोक के बढ़ते जोखिम का एक महत्वपूर्ण कारण बताते हुए इससे बचने की सलाह दी।
वैज्ञानिक सत्रों में विशेषज्ञों ने स्ट्रोक के आधुनिक उपचार, रेडियोलॉजिकल हस्तक्षेप, पुनर्वास, मानसिक स्वास्थ्य और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग जैसे विषयों पर चर्चा की। पीएमआर विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार पांडेय ने स्ट्रोक के बाद मरीजों की कार्यक्षमता बहाल करने में संज्ञानात्मक एवं पुनर्वास के महत्व को रेखांकित किया। रेडियो डायग्नोसिस के प्रोफेसर डॉ. सुभाष कुमार ने आधुनिक उपचार पद्धतियों एवं सक्रिय चिकित्सकीय हस्तक्षेप की सुविधाओं को विकसित करने पर जोर दिया। डॉ. आनंद कुमार राय ने स्ट्रोक के निदान और प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की संभावनाओं पर विचार रखे।
कार्यक्रम में एम्स पटना एवं आईजीआईएमएस के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया। वैज्ञानिक सत्रों में डॉ. रविकीर्ति, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. निस्का सिन्हा, डॉ. संतोष कुमार निराला, डॉ. मेघा सैगल और डॉ. पुनीत कुमार चौधरी सहित कई विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। कार्यक्रम के माध्यम से स्ट्रोक की रोकथाम, शीघ्र पहचान, त्वरित उपचार और पुनर्वास के लिए बहुविषयक चिकित्सा व्यवस्था की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।
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