📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Muhammad Mahdi Karim Facebook
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कृषि
एमपी के अनूपपुर में हाथियों के हमले, 15 साल में 17 ग्रामीण मारे, विधायक ने सीएम से स्थायी समाधान की मांग
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 26 अग. 2026, 09:17 PM
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मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में जंगली हाथियों ने पिछले 15 सालों में 17 ग्रामीणों की जान ली और फसलों को बार‑बार नुकसान पहुँचाया, जिससे विधायक ने सीएम से स्थायी समाधान की माँग की।
अनूपपुर जिले के वन-सीमा वाले क्षेत्रों में मानव‑हाथी टकराव की समस्या तेज़ी से बढ़ी है। पिछले पंद्रह वर्षों में कुल सत्रह ग्रामीणों की इस कारण मौत हो चुकी है, जिसमें अचानक हाथियों के दौड़ने या घरों पर हमले शामिल हैं। वही हाथी फसलों को भी बार‑बार नष्ट कर रहे हैं, जिससे गेहूँ, सोयाबीन और दाल जैसी प्रमुख फसलों का नुकसान हो रहा है और ग्रामीणों की आय पर असर पड़ रहा है।
स्थानीय प्रशासन ने कभी‑कभी गश्त और चेतावनी प्रणाली स्थापित की है, परन्तु इन उपायों से टकराव की आवृत्ति में कमी नहीं आई। वन्यजीवों के आवास में कमी और मौसमी प्रवास के कारण हाथी अक्सर रात में गाँव के किनारे तक पहुँचते हैं, जिससे निवासियों में डर और आर्थिक कठिनाइयाँ उत्पन्न हो रही हैं।
इन परिस्थितियों को देखते हुए, इस क्षेत्र के विधायक ने मुख्यमंत्री से मिलकर स्थायी समाधान की माँग की। उन्होंने वन्यजीव गलियारा बनवाने, संवेदनशील खेतों के चारों ओर विद्युत बाड़ लगवाने और जान‑माल के नुकसान के लिए मुआवजा योजना की मांग की। विधायक ने कहा कि केवल अल्पकालिक राहत पर्याप्त नहीं है; मानव जीवन और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा के लिए राज्य‑स्तर की समन्वित योजना आवश्यक है।
राज्य के अधिकारियों ने इस समस्या को स्वीकार किया है और हाथियों की गति‑पथ को समझने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण करने का वादा किया है। इस सर्वेक्षण के परिणाम भविष्य की नीतियों को दिशा देंगे, परन्तु ग्रामीण अभी भी अगली घटना के संभावित खतरे से चिंतित हैं।
यह घटना मध्य भारत में संरक्षण और ग्रामीण आजीविका के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को उजागर करती है, जहाँ मानव बस्तियों का विस्तार लगातार वन्यजीव आवासों के साथ टकरा रहा है।
स्थानीय प्रशासन ने कभी‑कभी गश्त और चेतावनी प्रणाली स्थापित की है, परन्तु इन उपायों से टकराव की आवृत्ति में कमी नहीं आई। वन्यजीवों के आवास में कमी और मौसमी प्रवास के कारण हाथी अक्सर रात में गाँव के किनारे तक पहुँचते हैं, जिससे निवासियों में डर और आर्थिक कठिनाइयाँ उत्पन्न हो रही हैं।
इन परिस्थितियों को देखते हुए, इस क्षेत्र के विधायक ने मुख्यमंत्री से मिलकर स्थायी समाधान की माँग की। उन्होंने वन्यजीव गलियारा बनवाने, संवेदनशील खेतों के चारों ओर विद्युत बाड़ लगवाने और जान‑माल के नुकसान के लिए मुआवजा योजना की मांग की। विधायक ने कहा कि केवल अल्पकालिक राहत पर्याप्त नहीं है; मानव जीवन और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा के लिए राज्य‑स्तर की समन्वित योजना आवश्यक है।
राज्य के अधिकारियों ने इस समस्या को स्वीकार किया है और हाथियों की गति‑पथ को समझने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण करने का वादा किया है। इस सर्वेक्षण के परिणाम भविष्य की नीतियों को दिशा देंगे, परन्तु ग्रामीण अभी भी अगली घटना के संभावित खतरे से चिंतित हैं।
यह घटना मध्य भारत में संरक्षण और ग्रामीण आजीविका के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को उजागर करती है, जहाँ मानव बस्तियों का विस्तार लगातार वन्यजीव आवासों के साथ टकरा रहा है।