📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rajesh Dhungana
स्थानीय
भरणपुर आश्रम में तीन साल बाद बुजुर्ग रामबाबू को मिला परिवार
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 25 सित. 2026, 11:15 PM
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तीन साल बाद, इलाज के लिए अलिगढ़ गए रामबाबू को भरतपुर के आश्रम में अपने बच्चों से मिलवाया गया।
भरणपुर के आश्रम में रहने वाले रामबाबू तीन साल से अपने परिवार से बिछड़े थे, क्योंकि वह इलाज के सिलसिले में अलिगढ़ चले गए थे। उपचार पूरा करने के बाद वह आश्रम लौट आए।
आश्रम के कर्मचारियों ने उनका पता लगाने के लिए तुरंत कार्रवाई की। उनके प्रयासों से रामबाबू के बेटे‑बेटियों का पता चल गया और वे आश्रम में पहुंचकर अपने पिता को लेने आए।
बच्चों को अपने पिता को देखकर बुजुर्ग रामबाबू की आँखों से आँसू बह निकले, क्योंकि तीन साल बाद यह मिलन उनके लिए अत्यंत भावुक था। परिवार ने तुरंत उन्हें घर ले जाकर फिर से एक साथ रहने की व्यवस्था की।
यह घटना स्थानीय संस्थानों की भूमिका को उजागर करती है, जो स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों के दौरान परिवारों को पुनः जोड़ने में मददगार साबित होते हैं।
आश्रम के कर्मचारियों ने उनका पता लगाने के लिए तुरंत कार्रवाई की। उनके प्रयासों से रामबाबू के बेटे‑बेटियों का पता चल गया और वे आश्रम में पहुंचकर अपने पिता को लेने आए।
बच्चों को अपने पिता को देखकर बुजुर्ग रामबाबू की आँखों से आँसू बह निकले, क्योंकि तीन साल बाद यह मिलन उनके लिए अत्यंत भावुक था। परिवार ने तुरंत उन्हें घर ले जाकर फिर से एक साथ रहने की व्यवस्था की।
यह घटना स्थानीय संस्थानों की भूमिका को उजागर करती है, जो स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों के दौरान परिवारों को पुनः जोड़ने में मददगार साबित होते हैं।