📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Shaksham Parimal
शिक्षा
इंस्पिरेशन: परीक्षा दबाव और अकेलेपन से ग्रसित 8 आईआईटी दिल्ली छात्रों की आत्महत्या
✍️ The Indian Express
🗓 26 अग. 2026, 10:32 PM
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इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि परीक्षा में असफलता और सामाजिक अलगाव के कारण आईआईटी दिल्ली के आठ छात्रों ने आत्महत्या की।
आईआईटी दिल्ली के आठ स्नातक छात्रों की अलग‑अलग घटनाओं में मृत्यु हुई, सभी मामलों को आत्महत्या के रूप में दर्ज किया गया, जैसा कि इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया। ये दुखद घटनाएँ पिछले कुछ महीनों में घटीं और पूरे देश के शैक्षणिक माहौल को हिला कर रख दिया है।
जांच से पता चला कि प्रत्येक छात्र को अत्यधिक शैक्षणिक दबाव का सामना करना पड़ा, कई ने हाल ही में परीक्षा में असफलता को मुख्य कारण बताया। साथियों ने बताया कि इन छात्रों ने सामाजिक संपर्क से दूरी बना ली थी और कैंपस गतिविधियों में भाग नहीं ले रहे थे।
आईआईटी दिल्ली के अधिकारियों ने गहरा शोक व्यक्त किया और कैंपस में काउंसलिंग सेवाओं को सुदृढ़ करने का वादा किया। संस्थान के निदेशक ने मौजूदा मानसिक‑स्वास्थ्य समर्थन ढाँचे की तुरंत समीक्षा करने और छात्रों को बिना कलंक के मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करने का ऐलान किया।
यह घटनाएँ भारत के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में छात्र आत्महत्याओं की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करती हैं, जिससे शिक्षकों और नीति निर्माताओं ने उच्च शिक्षा में मानसिक‑स्वास्थ्य संसाधनों के व्यापक सुधार की मांग की है।
अब अधिकारियों द्वारा यह जांच की जा रही है कि क्या प्रणालीगत दबाव ने इन मौतों में योगदान दिया, जबकि छात्र समूह पारदर्शी रिपोर्टिंग और संभावित उपायों की मांग कर रहे हैं ताकि संवेदनशील छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
जांच से पता चला कि प्रत्येक छात्र को अत्यधिक शैक्षणिक दबाव का सामना करना पड़ा, कई ने हाल ही में परीक्षा में असफलता को मुख्य कारण बताया। साथियों ने बताया कि इन छात्रों ने सामाजिक संपर्क से दूरी बना ली थी और कैंपस गतिविधियों में भाग नहीं ले रहे थे।
आईआईटी दिल्ली के अधिकारियों ने गहरा शोक व्यक्त किया और कैंपस में काउंसलिंग सेवाओं को सुदृढ़ करने का वादा किया। संस्थान के निदेशक ने मौजूदा मानसिक‑स्वास्थ्य समर्थन ढाँचे की तुरंत समीक्षा करने और छात्रों को बिना कलंक के मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करने का ऐलान किया।
यह घटनाएँ भारत के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में छात्र आत्महत्याओं की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करती हैं, जिससे शिक्षकों और नीति निर्माताओं ने उच्च शिक्षा में मानसिक‑स्वास्थ्य संसाधनों के व्यापक सुधार की मांग की है।
अब अधिकारियों द्वारा यह जांच की जा रही है कि क्या प्रणालीगत दबाव ने इन मौतों में योगदान दिया, जबकि छात्र समूह पारदर्शी रिपोर्टिंग और संभावित उपायों की मांग कर रहे हैं ताकि संवेदनशील छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।