📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Talbot photography
नौकरी
डिजिटल वित्तीय अंतर से भारतीय महिलाओं की प्लेटफ़ॉर्म काम में भागीदारी घटती
✍️ Business Standard
🗓 25 अग. 2026, 03:38 AM
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बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल वित्तीय सेवाओं की कमी भारतीय महिलाओं को प्लेटफ़ॉर्म काम में शामिल होने से रोक रही है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा प्रकाशित हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि डिजिटल वित्तीय अंतर भारतीय महिलाओं की प्लेटफ़ॉर्म‑आधारित नौकरियों में भागीदारी को सीमित कर रहा है। कई महिलाओं के पास ऑनलाइन बैंक खाते, मोबाइल वॉलेट और क्रेडिट जैसी आवश्यक डिजिटल वित्तीय सेवाओं की पहुँच नहीं है, जो आज के ऑनलाइन मार्केटप्लेस में काम पाने के लिए जरूरी हो गई हैं।
रिपोर्ट बताती है कि प्लेटफ़ॉर्म काम, जैसे फ़ूड डिलीवरी या फ्रीलांस सेवाएँ, अक्सर तेज़ डिजिटल लेन‑देनों और उपकरण या इन्वेंट्री के लिए क्रेडिट की मांग करता है। इन वित्तीय साधनों की कमी के कारण महिलाएँ प्रवेश लागत में अधिक बोझ झेलती हैं और पुरुषों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाती हैं, जो डिजिटल वित्तीय समाधान आसानी से उपयोग कर लेते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लक्षित नीति उपायों की जरूरत है, जैसे महिलाओं के लिए डिजिटल बैंकिंग का विस्तार, केवाईसी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, और गिग इकोनॉमी के अनुरूप वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम चलाना। ऐसे कदम डिजिटल अंतर को पाटने और अधिक समावेशी कार्यबल बनाने में मदद करेंगे।
रिपोर्ट इस बात पर भी प्रकाश डालती है कि डिजिटल बहिष्करण का व्यापक आर्थिक प्रभाव है; वित्तीय अंतर को कम करने से बड़ी संख्या में प्रतिभा को रोजगार मिलेगा और भारत के डिजिटल विकास लक्ष्यों को गति मिलेगी।
रिपोर्ट बताती है कि प्लेटफ़ॉर्म काम, जैसे फ़ूड डिलीवरी या फ्रीलांस सेवाएँ, अक्सर तेज़ डिजिटल लेन‑देनों और उपकरण या इन्वेंट्री के लिए क्रेडिट की मांग करता है। इन वित्तीय साधनों की कमी के कारण महिलाएँ प्रवेश लागत में अधिक बोझ झेलती हैं और पुरुषों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाती हैं, जो डिजिटल वित्तीय समाधान आसानी से उपयोग कर लेते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लक्षित नीति उपायों की जरूरत है, जैसे महिलाओं के लिए डिजिटल बैंकिंग का विस्तार, केवाईसी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, और गिग इकोनॉमी के अनुरूप वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम चलाना। ऐसे कदम डिजिटल अंतर को पाटने और अधिक समावेशी कार्यबल बनाने में मदद करेंगे।
रिपोर्ट इस बात पर भी प्रकाश डालती है कि डिजिटल बहिष्करण का व्यापक आर्थिक प्रभाव है; वित्तीय अंतर को कम करने से बड़ी संख्या में प्रतिभा को रोजगार मिलेगा और भारत के डिजिटल विकास लक्ष्यों को गति मिलेगी।