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धतूरा: शरद ऋतु के शिवभेंट से लेकर आज के मुद्दों तक
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Medhi jyoti
धर्म

धतूरा: शरद ऋतु के शिवभेंट से लेकर आज के मुद्दों तक

✍️ News18 🗓 26 अग. 2026, 09:48 AM 👁 38
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धतूरा, एक जहरीला पौधा जिसे शरद ऋतु के शिवभेंट में पूजा जाता है, अब इसके औषधीय और अवैध उपयोगों पर चर्चा हो रही है।

धतूरा (Datura stramonium) एक कांटेदार झाड़ी है जो मूल रूप से अमेरिका से है, पर अब भारत में व्यापक रूप से पाई जाती है। इस पौधे के चमकीले नारंगी या बैंगनी फूल और बड़े बीज ग्रामीण परिदृश्य में आम दृश्य बनाते हैं।

शरद ऋतु के पवित्र महीने में, भक्त धतूरा को भगवान शिव को अर्पित करते हैं, जो भक्ति और प्रायश्चित्त का प्रतीक माना जाता है। यह अनुष्ठान परंपरा में गहराई से निहित है और माना जाता है कि यह देवता को प्रसन्न करता है तथा दुर्भाग्य से बचाता है।

हालाँकि कुछ आयुर्वेदिक तैयारियों में दर्द निवारण और शान्तिदायक गुणों के लिए धतूरा का उपयोग किया जाता है, इसके एल्कलॉइड—स्कोपोलामाइन और हायोसाइनीमिन—बहुत विषैले होते हैं। अधिक मात्रा में सेवन से भ्रम, मतिभ्रम और मृत्यु भी हो सकती है।

हाल के रिपोर्टों में धतूरा की अवैध खेती और काले बाजार में बिक्री में वृद्धि का संकेत मिलता है, जिसके कारण अधिकारियों ने नियमों को कड़ा किया है और इसके खतरों के प्रति सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाई है।
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