📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / kanandevi.com
शिक्षा
देवी ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा रोकने के लिए लड़कों में सम्मान की शिक्षा की अपील की
✍️ Nagaland Post
🗓 09 अक्टू. 2026, 08:32 AM
👁 20
एक हालिया बयान में, देवी ने नागालैंड में महिलाओं के खिलाफ अपराध कम करने के लिए लड़कों को सम्मान सिखाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
नागालैंड की कार्यकर्ता देवी ने लड़कों में महिलाओं के प्रति सम्मान की शिक्षा देने की तात्कालिक आवश्यकता पर बल दिया, यह कहते हुए कि प्रारंभिक शिक्षा लिंग‑आधारित अपराधों को काफी हद तक कम कर सकती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति सामाजिक रवैये बचपन में ही बनते हैं, और स्कूल, परिवार तथा सामुदायिक समूहों को मिलकर समानता और अहिंसा के मूल्यों को सिखाना चाहिए।
देवी ने बताया कि कानूनी सुरक्षा के बावजूद, महिलाओं के खिलाफ अपराध राज्य में लगातार बना हुआ है। वह मानती हैं कि किशोरावस्था से पहले लड़कों के मनोवृत्ति को बदलकर हिंसा का चक्र तोड़ा जा सकता है, जिससे महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थान और कार्यस्थल सुरक्षित हो जाएंगे।
उनकी मांग में स्कूल पाठ्यक्रम में लिंग‑संवेदनशीलता मॉड्यूल शामिल करना, अभिभावकों के लिए कार्यशालाएं आयोजित करना और सकारात्मक पुरुष रोल मॉडल को दर्शाने वाले मीडिया अभियान चलाना शामिल है। देवी ने नीति निर्माताओं से इन पहलों के लिए संसाधन आवंटित करने का आग्रह किया, यह कहते हुए कि रोकथाम दंडात्मक उपायों से अधिक प्रभावी है।
शिक्षा विभाग और नागरिक समाज के कई समूहों ने इस प्रस्ताव का समर्थन जताया है, और कहा है कि इस वर्ष के अंत में कुछ जिलों में पायलट कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं। यह पहल एक सांस्कृतिक बदलाव लाने का लक्ष्य रखती है, जिससे महिलाओं के प्रति सम्मान सामान्य हो और किसी भी प्रकार की उत्पीड़न या हिंसा को हतोत्साहित किया जा सके।
यदि इस रणनीति को व्यापक रूप से लागू किया गया, तो यह अन्य भारतीय राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकती है, जो समान लिंग समानता और महिलाओं की सुरक्षा के राष्ट्रीय एजेंडे को सुदृढ़ करेगी।
देवी ने बताया कि कानूनी सुरक्षा के बावजूद, महिलाओं के खिलाफ अपराध राज्य में लगातार बना हुआ है। वह मानती हैं कि किशोरावस्था से पहले लड़कों के मनोवृत्ति को बदलकर हिंसा का चक्र तोड़ा जा सकता है, जिससे महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थान और कार्यस्थल सुरक्षित हो जाएंगे।
उनकी मांग में स्कूल पाठ्यक्रम में लिंग‑संवेदनशीलता मॉड्यूल शामिल करना, अभिभावकों के लिए कार्यशालाएं आयोजित करना और सकारात्मक पुरुष रोल मॉडल को दर्शाने वाले मीडिया अभियान चलाना शामिल है। देवी ने नीति निर्माताओं से इन पहलों के लिए संसाधन आवंटित करने का आग्रह किया, यह कहते हुए कि रोकथाम दंडात्मक उपायों से अधिक प्रभावी है।
शिक्षा विभाग और नागरिक समाज के कई समूहों ने इस प्रस्ताव का समर्थन जताया है, और कहा है कि इस वर्ष के अंत में कुछ जिलों में पायलट कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं। यह पहल एक सांस्कृतिक बदलाव लाने का लक्ष्य रखती है, जिससे महिलाओं के प्रति सम्मान सामान्य हो और किसी भी प्रकार की उत्पीड़न या हिंसा को हतोत्साहित किया जा सके।
यदि इस रणनीति को व्यापक रूप से लागू किया गया, तो यह अन्य भारतीय राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकती है, जो समान लिंग समानता और महिलाओं की सुरक्षा के राष्ट्रीय एजेंडे को सुदृढ़ करेगी।