📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / United States Department of State
शिक्षा
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला को टीआरएस कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव की मांग पर एनएसयूआई ने घेरा
✍️ Amar Ujala · Rewa
🗓 03 नव. 2026, 06:45 PM
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टीआरएस कॉलेज, रीवा में भाजपा कार्यक्रम के दौरान, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय के नेतृत्व में छात्र नेताओं ने डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला को घेरकर छात्रसंघ चुनाव की मांग की।
रीवा, मध्य प्रदेश – भाजपा के "लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ" कार्यक्रम के दौरान टीआरएस कॉलेज में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला को घेर लिया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व एनएसयूआई जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने किया और उन्होंने छात्रसंघ चुनाव के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग की।
गवाहों के अनुसार, एनएसयूआई ने स्पष्ट और लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया की मांग करते हुए नारे लगाए और पोस्टर लगाए, क्योंकि कई महीनों से छात्रसंघ चुनाव स्थगित रहे हैं। डिप्टी सीएम ने मांगें सुनीं, पर अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
प्रदर्शन में कोई हिंसा नहीं हुई और सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित रखा। भाजपा का कार्यक्रम बाद में जारी रहा, जबकि एनएसयूआई ने चुनाव के समय‑सारिणी को तेज करने का संकल्प दोहराया।
स्थानीय अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे इस मुद्दे की जांच करें और विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार छात्रसंघ चुनाव करवाने को सुनिश्चित करें। यह घटना मध्य प्रदेश के कई कॉलेजों में छात्र प्रतिनिधित्व और शासकीय हस्तक्षेप के बीच बढ़ती टकराव को दर्शाती है।
एनएसयूआई का यह कदम राज्य में हाल ही में हुए कई कैंपस विरोधों में से एक है, जो उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्र आवाज़ और शासन के बारे में व्यापक चिंताओं को उजागर करता है।
गवाहों के अनुसार, एनएसयूआई ने स्पष्ट और लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया की मांग करते हुए नारे लगाए और पोस्टर लगाए, क्योंकि कई महीनों से छात्रसंघ चुनाव स्थगित रहे हैं। डिप्टी सीएम ने मांगें सुनीं, पर अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
प्रदर्शन में कोई हिंसा नहीं हुई और सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित रखा। भाजपा का कार्यक्रम बाद में जारी रहा, जबकि एनएसयूआई ने चुनाव के समय‑सारिणी को तेज करने का संकल्प दोहराया।
स्थानीय अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे इस मुद्दे की जांच करें और विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार छात्रसंघ चुनाव करवाने को सुनिश्चित करें। यह घटना मध्य प्रदेश के कई कॉलेजों में छात्र प्रतिनिधित्व और शासकीय हस्तक्षेप के बीच बढ़ती टकराव को दर्शाती है।
एनएसयूआई का यह कदम राज्य में हाल ही में हुए कई कैंपस विरोधों में से एक है, जो उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्र आवाज़ और शासन के बारे में व्यापक चिंताओं को उजागर करता है।