📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
राजनीति
जम्मू-कश्मीर के डिप्टी सीएम ने गैर-स्थानीय चीफ सचिव की नियुक्ति पर सवाल उठाए
✍️ Kashmir Life
🗓 08 नव. 2026, 04:46 PM
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डिप्टी सीएम ने जम्मू-कश्मीर में गैर‑स्थानीय अधिकारी को चीफ सचिव नियुक्त करने पर आपत्ति जताते हुए स्थानीय उम्मीदवार को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
जम्मू-कश्मीर के डिप्टी सीएम ने राज्य के चीफ सचिव के पद पर बाहरी अधिकारी की नियुक्ति पर सवाल उठाए। मीडिया को दिए बयान में उन्होंने पूछा कि स्थानीय अधिकारी को इस शीर्ष प्रशासनिक पद के लिए क्यों नहीं चुना गया, और प्रदेश की सर्वोच्च प्रशासनिक इकाई में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर बल दिया।
चीफ सचिव, जो राज्य की नौकरशाही का प्रमुख होता है, आमतौर पर केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी होते हैं। हालिया नियुक्ति ने स्थानीय राजनीतिक नेताओं में बहस छेड़ दी है, जो तर्क देते हैं कि प्रदेश के विशेष मुद्दों को समझने में स्थानीय अधिकारी अधिक सक्षम होते हैं।
सरकार ने अभी तक डिप्टी सीएम के बयानों का औपचारिक जवाब नहीं दिया है, पर अधिकारियों ने कहा कि चयन प्रक्रिया स्थापित प्रोटोकॉल के तहत की गई है और नियुक्त अधिकारी के पास जम्मू-कश्मीर के मामलों को संभालने का पर्याप्त अनुभव है।
यह मुद्दा केंद्र और स्थानीय नेतृत्व के बीच शक्ति संतुलन और शासन में स्थानीय विशेषज्ञता की भूमिका पर चल रहे तनाव को उजागर करता है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद से नियुक्ति नीतियों की पुनः समीक्षा हो सकती है, जिससे जम्मू-कश्मीर में वरिष्ठ पदों पर स्थानीय IAS अधिकारियों को अधिक अवसर मिल सकते हैं।
चीफ सचिव, जो राज्य की नौकरशाही का प्रमुख होता है, आमतौर पर केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी होते हैं। हालिया नियुक्ति ने स्थानीय राजनीतिक नेताओं में बहस छेड़ दी है, जो तर्क देते हैं कि प्रदेश के विशेष मुद्दों को समझने में स्थानीय अधिकारी अधिक सक्षम होते हैं।
सरकार ने अभी तक डिप्टी सीएम के बयानों का औपचारिक जवाब नहीं दिया है, पर अधिकारियों ने कहा कि चयन प्रक्रिया स्थापित प्रोटोकॉल के तहत की गई है और नियुक्त अधिकारी के पास जम्मू-कश्मीर के मामलों को संभालने का पर्याप्त अनुभव है।
यह मुद्दा केंद्र और स्थानीय नेतृत्व के बीच शक्ति संतुलन और शासन में स्थानीय विशेषज्ञता की भूमिका पर चल रहे तनाव को उजागर करता है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद से नियुक्ति नीतियों की पुनः समीक्षा हो सकती है, जिससे जम्मू-कश्मीर में वरिष्ठ पदों पर स्थानीय IAS अधिकारियों को अधिक अवसर मिल सकते हैं।