📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / NOAA
मौसम
बॉन्गो की खाड़ी में डिप्रेशन, मौसम विभाग ने चक्रवात चेतावनी जारी की
✍️ Kanak News Odisha
🗓 02 नव. 2026, 01:33 AM
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भारतीय मौसम विभाग ने बॉन्गो की खाड़ी में डिप्रेशन की पहचान की और क्षेत्र के लिए चक्रवात चेतावनी जारी की।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आज सुबह बॉन्गो की खाड़ी में एक उष्णकटिबंधीय डिप्रेशन की पहचान की है। उपग्रह चित्र और सतही अवलोकनों से स्पष्ट कम दबाव वाला क्षेत्र और बढ़ती चक्रवातीय गति दिखी।
IMD ने इस प्रणाली को डिप्रेशन के रूप में वर्गीकृत कर चक्रवात चेतावनी जारी की है और तटीय राज्यों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। विभाग ने बताया कि समुद्र के सतह का तापमान अधिक है और पवन शियर कम है, जिससे आगे तीव्रता बढ़ने की संभावना है।
पूर्वी तटीय जिलों के प्राधिकरणों से इस प्रणाली को निकटता से निगरानी करने और भारी बारिश, तेज़ हवाओं तथा तूफ़ानी लहरों के लिए तैयार रहने को कहा गया है। निवासियों को आधिकारिक अपडेट का पालन करने और स्थिति बिगड़ने पर निकासी आदेशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
IMD स्थिति के विकास के साथ नियमित सलाह जारी करता रहेगा, अगला अपडेट अगले छह घंटे में अपेक्षित है। मौसम विज्ञानी चेतावनी देते हैं कि वर्तमान में डिप्रेशन मध्यम है, परंतु तेज़ी से तीव्रता बढ़ने की संभावना को नहीं नकारा जा सकता।
यह विकास प्री‑मानसून मौसम में बॉन्गो की खाड़ी के तटवर्ती क्षेत्रों में सतर्कता और तैयारियों की आवश्यकता को दोहराता है।
IMD ने इस प्रणाली को डिप्रेशन के रूप में वर्गीकृत कर चक्रवात चेतावनी जारी की है और तटीय राज्यों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। विभाग ने बताया कि समुद्र के सतह का तापमान अधिक है और पवन शियर कम है, जिससे आगे तीव्रता बढ़ने की संभावना है।
पूर्वी तटीय जिलों के प्राधिकरणों से इस प्रणाली को निकटता से निगरानी करने और भारी बारिश, तेज़ हवाओं तथा तूफ़ानी लहरों के लिए तैयार रहने को कहा गया है। निवासियों को आधिकारिक अपडेट का पालन करने और स्थिति बिगड़ने पर निकासी आदेशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
IMD स्थिति के विकास के साथ नियमित सलाह जारी करता रहेगा, अगला अपडेट अगले छह घंटे में अपेक्षित है। मौसम विज्ञानी चेतावनी देते हैं कि वर्तमान में डिप्रेशन मध्यम है, परंतु तेज़ी से तीव्रता बढ़ने की संभावना को नहीं नकारा जा सकता।
यह विकास प्री‑मानसून मौसम में बॉन्गो की खाड़ी के तटवर्ती क्षेत्रों में सतर्कता और तैयारियों की आवश्यकता को दोहराता है।