📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Women and Child Development
राजनीति
दिल्ली में जंतर मंतर को डिनोटिफाई किया, नई प्रदर्शन स्थलों पर विवाद
✍️ India Today
🗓 16 अक्टू. 2026, 04:31 AM
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दिल्ली सरकार ने जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल का दर्जा हटाते हुए नई जगहों पर प्रदर्शन करने की दिशा में कदम बढ़ाया, जिससे प्रदर्शन अधिकार और स्थल चयन पर बहस छिड़ गई।
दिल्ली सरकार ने मंगलवार को घोषणा की कि जंतर मंतर को अब प्रदर्शन स्थल के रूप में मान्यता नहीं दी जाएगी। यह कदम दिल्ली पुलिस (संशोधन) नियमों के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य बड़े समूहों के ट्रैफिक और सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा डालने वाले प्रदर्शन को रोकना है।
प्रशासन ने बताया कि इस निर्णय से ऐतिहासिक स्मारक की सुरक्षा होगी और प्रदर्शनकारियों को ऐसे वैकल्पिक स्थानों की ओर आकर्षित किया जाएगा जहाँ भीड़ को बिना शहर की सेवाओं को प्रभावित किए समायोजित किया जा सके। यमुना के निकट खुले मैदान और दक्षिण दिल्ली के सामुदायिक हॉल को संभावित स्थलों की सूची में शामिल किया गया है।
विरोधी दलों और कई कार्यकर्ता संगठनों ने इस डिनोटिफिकेशन की आलोचना की, यह तर्क देते हुए कि यह शांतिपूर्ण सभा के संवैधानिक अधिकार को सीमित करता है। उनका कहना है कि नए स्थल जंतर मंतर की प्रतीकात्मक महत्ता और दृश्यता से वंचित हैं, जो 1990 के दशक से प्रदर्शन का केंद्र रहा है।
दिल्ली सरकार ने सभी हितधारकों को अगले सप्ताह एक परामर्श बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है, ताकि नई प्रदर्शन स्थलों के आवंटन को अंतिम रूप दिया जा सके। इस बीच, पुलिस ने चेतावनी दी है कि जंतर मंतर पर बिना अनुमति के कोई भी सभा कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है।
यह विकास राजधानी में शहरी व्यवधान को नियंत्रित करने की कोशिशों और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच बढ़ती टकराव को उजागर करता है।
प्रशासन ने बताया कि इस निर्णय से ऐतिहासिक स्मारक की सुरक्षा होगी और प्रदर्शनकारियों को ऐसे वैकल्पिक स्थानों की ओर आकर्षित किया जाएगा जहाँ भीड़ को बिना शहर की सेवाओं को प्रभावित किए समायोजित किया जा सके। यमुना के निकट खुले मैदान और दक्षिण दिल्ली के सामुदायिक हॉल को संभावित स्थलों की सूची में शामिल किया गया है।
विरोधी दलों और कई कार्यकर्ता संगठनों ने इस डिनोटिफिकेशन की आलोचना की, यह तर्क देते हुए कि यह शांतिपूर्ण सभा के संवैधानिक अधिकार को सीमित करता है। उनका कहना है कि नए स्थल जंतर मंतर की प्रतीकात्मक महत्ता और दृश्यता से वंचित हैं, जो 1990 के दशक से प्रदर्शन का केंद्र रहा है।
दिल्ली सरकार ने सभी हितधारकों को अगले सप्ताह एक परामर्श बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है, ताकि नई प्रदर्शन स्थलों के आवंटन को अंतिम रूप दिया जा सके। इस बीच, पुलिस ने चेतावनी दी है कि जंतर मंतर पर बिना अनुमति के कोई भी सभा कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है।
यह विकास राजधानी में शहरी व्यवधान को नियंत्रित करने की कोशिशों और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच बढ़ती टकराव को उजागर करता है।