📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prami.ap90
मौसम
दिल्ली में 96 घंटे में AQI 124 से 400 से ऊपर बढ़ा
✍️ India Today
🗓 04 नव. 2026, 06:01 AM
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दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 124 से बढ़कर 96 घंटे में 400 से ऊपर पहुंच गया, जिससे त्वरित चेतावनी जारी की गई।
दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ने 124 से बढ़कर 96 घंटे में 400 से ऊपर पहुंचकर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया, जिससे शहर को गंभीर प्रदूषण वर्ग में वर्गीकृत किया गया। यह तीव्र वृद्धि लगातार तीन दिनों में दर्ज की गई, जिससे AQI स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा निर्धारित खतरनाक सीमा से ऊपर चला गया।
स्वास्थ्य एजेंसियों ने नागरिकों को बाहर की गतिविधियों को सीमित करने, विशेषकर श्वसन रोगियों को, और बाहर निकलते समय मास्क पहनने की सलाह दी है। प्रभावित क्षेत्रों में स्कूलों और कार्यस्थलों को इनडोर वायु गुणवत्ता की निगरानी करने और संभव हो तो रिमोट कार्य व्यवस्था अपनाने का निर्देश दिया गया है।
शहर के अधिकारियों ने पुष्टि की कि दिल्ली के विभिन्न मॉनिटरिंग स्टेशन ने इस उछाल को दर्ज किया है और अचानक वायु गुणवत्ता गिरावट के कारणों की विस्तृत जांच चल रही है। जबकि सटीक कारण अभी जांच के अधीन हैं, अधिकारियों ने जनता को समय‑समय पर जानकारी देने और उपलब्ध डेटा के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाने का वादा किया है।
AQI में इस अभूतपूर्व वृद्धि ने शहर की लगातार चल रही वायु‑प्रदूषण समस्या को उजागर किया है, जिससे कड़ी उत्सर्जन नियंत्रण और क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से वायु गुणवत्ता सुधारने की मांग फिर से तेज हुई है।
स्वास्थ्य एजेंसियों ने नागरिकों को बाहर की गतिविधियों को सीमित करने, विशेषकर श्वसन रोगियों को, और बाहर निकलते समय मास्क पहनने की सलाह दी है। प्रभावित क्षेत्रों में स्कूलों और कार्यस्थलों को इनडोर वायु गुणवत्ता की निगरानी करने और संभव हो तो रिमोट कार्य व्यवस्था अपनाने का निर्देश दिया गया है।
शहर के अधिकारियों ने पुष्टि की कि दिल्ली के विभिन्न मॉनिटरिंग स्टेशन ने इस उछाल को दर्ज किया है और अचानक वायु गुणवत्ता गिरावट के कारणों की विस्तृत जांच चल रही है। जबकि सटीक कारण अभी जांच के अधीन हैं, अधिकारियों ने जनता को समय‑समय पर जानकारी देने और उपलब्ध डेटा के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाने का वादा किया है।
AQI में इस अभूतपूर्व वृद्धि ने शहर की लगातार चल रही वायु‑प्रदूषण समस्या को उजागर किया है, जिससे कड़ी उत्सर्जन नियंत्रण और क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से वायु गुणवत्ता सुधारने की मांग फिर से तेज हुई है।