📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Govt. of India
अपराध
दिल्ली पुलिस ने एसीपी‑जर्नलिस्ट की सीसीटीवी फुटेज को एआई‑जेनरेटेड कहा, हरियाणा के व्यक्ति को गिरफ्तार किया
✍️ News18
🗓 07 अक्टू. 2026, 05:01 AM
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दिल्ली पुलिस ने बताया कि एसीपी और पत्रकार की सीसीटीवी वीडियो एआई से बनायी गई है और इस संबंध में हरियाणा के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि एसीपी और पत्रकार को दिखाने वाला हालिया सीसीटीवी वीडियो असली नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, फॉरेन्सिक जांच में पता चला कि इस फुटेज को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के ज़रिए बदल‑बदल कर बनाया गया है, जिससे यह एक नकली सामग्री बन गई है।
जांच में पता चला कि इस संशोधित वीडियो का स्रोत हरियाणा में रहने वाले एक व्यक्ति से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस ने एक समन्वित कार्रवाई के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया है और वह आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में है।
पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि एआई‑जनित सामग्री का प्रसार जनता के भरोसे को कमजोर करता है और ऐसी किसी भी कोशिश के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने भविष्य में इसी तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सीसीटीवी प्रोटोकॉल की समीक्षा भी शुरू कर दी है।
यह मामला भारत में डीप‑फेक तकनीक के बढ़ते खतरे को उजागर करता है, विशेषकर जब यह कानून प्रवर्तन अधिकारियों को शामिल करता है। अधिकारियों ने मीडिया और जनता से अनुरोध किया है कि वे वीडियो की सत्यता की जाँच करके ही उसे साझा करें।
जांच के आगे के विवरण अभी सीमित हैं, क्योंकि पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह वीडियो कितनी व्यापक रूप से फैला और इसके पीछे क्या उद्देश्य हो सकता है।
जांच में पता चला कि इस संशोधित वीडियो का स्रोत हरियाणा में रहने वाले एक व्यक्ति से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस ने एक समन्वित कार्रवाई के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया है और वह आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में है।
पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि एआई‑जनित सामग्री का प्रसार जनता के भरोसे को कमजोर करता है और ऐसी किसी भी कोशिश के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने भविष्य में इसी तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सीसीटीवी प्रोटोकॉल की समीक्षा भी शुरू कर दी है।
यह मामला भारत में डीप‑फेक तकनीक के बढ़ते खतरे को उजागर करता है, विशेषकर जब यह कानून प्रवर्तन अधिकारियों को शामिल करता है। अधिकारियों ने मीडिया और जनता से अनुरोध किया है कि वे वीडियो की सत्यता की जाँच करके ही उसे साझा करें।
जांच के आगे के विवरण अभी सीमित हैं, क्योंकि पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह वीडियो कितनी व्यापक रूप से फैला और इसके पीछे क्या उद्देश्य हो सकता है।