📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Avrajyoti Mitra
नौकरी
दिल्ली हाई कोर्ट ने यूपीएनएल स्टाफर की वेतन कटौती को रोका
✍️ Pioneer Edge
🗓 10 अक्टू. 2026, 10:36 PM
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दिल्ली हाई कोर्ट ने यूपीएनएल के एक स्टाफर की वेतन घटाने के प्रस्ताव को रोकते हुए आदेश जारी किया।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को एक अंतरिम आदेश जारी किया, जिसमें यूनीटेड प्रोग्रेसिव नेशनल लीग (UPNL) के एक स्टाफर की वेतन कटौती को रोका गया है। यह आदेश वेतन घटाने के प्रस्ताव को तब तक लागू होने से रोकता है जब तक आगे की सुनवाई न हो, जिससे स्टाफर की मौजूदा वेतन संरचना बरकरार रहती है।
कोर्ट के दस्तावेज़ों के अनुसार, स्टाफर ने यह दायर किया था कि प्रस्तावित वेतन कटौती उनके अनुबंधीय शर्तों और श्रम कानूनों का उल्लंघन करती है। उन्होंने बताया कि इस कटौती से उन्हें आर्थिक कठिनाई होगी और यह उचित प्रक्रिया के बिना की गई है।
सुनवाई के बाद, बेंच ने नियोक्ता को वर्तमान वेतन स्तर बनाए रखने और वेतन कटौती के कारणों का विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया। इस मामले के मूल प्रश्न पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है, और आगे की सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध किया गया है।
क़ानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि रोजगार संबंधी विवादों में ऐसी अंतरिम राहतें आम हैं, विशेषकर जब कर्मचारी के उचित वेतन अधिकार पर सवाल उठता है। यह निर्णय यह दर्शाता है कि वेतन में कोई भी परिवर्तन उचित प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।
UPNL ने अभी तक कोर्ट के आदेश पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है, और स्टाफर की भविष्य की रोजगार स्थिति आगे की न्यायिक समीक्षा पर निर्भर करेगी।
कोर्ट के दस्तावेज़ों के अनुसार, स्टाफर ने यह दायर किया था कि प्रस्तावित वेतन कटौती उनके अनुबंधीय शर्तों और श्रम कानूनों का उल्लंघन करती है। उन्होंने बताया कि इस कटौती से उन्हें आर्थिक कठिनाई होगी और यह उचित प्रक्रिया के बिना की गई है।
सुनवाई के बाद, बेंच ने नियोक्ता को वर्तमान वेतन स्तर बनाए रखने और वेतन कटौती के कारणों का विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया। इस मामले के मूल प्रश्न पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है, और आगे की सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध किया गया है।
क़ानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि रोजगार संबंधी विवादों में ऐसी अंतरिम राहतें आम हैं, विशेषकर जब कर्मचारी के उचित वेतन अधिकार पर सवाल उठता है। यह निर्णय यह दर्शाता है कि वेतन में कोई भी परिवर्तन उचित प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।
UPNL ने अभी तक कोर्ट के आदेश पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है, और स्टाफर की भविष्य की रोजगार स्थिति आगे की न्यायिक समीक्षा पर निर्भर करेगी।