📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Kamlesh.legalaid
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने पनीर जैसा गैर‑डेयरी उत्पाद पर दायर याचिका पर जवाब माँगे
✍️ Business Standard
🗓 15 अक्टू. 2026, 08:36 AM
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने पनीर जैसा गैर‑डेयरी उत्पाद पर दायर याचिका के संबंध में संबंधित अधिकारियों से जवाब माँगे हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय से एक याचिका के जवाब के लिए विस्तृत उत्तर मांगते हुए एक नोटिस जारी किया है। यह याचिका एक उपभोक्ता अधिकार समूह द्वारा दायर की गई है, जिसमें दावा किया गया है कि कुछ गैर‑डेयरी पनीर उत्पादों को वास्तविक डेयरी पनीर के रूप में विपणन और बेचा जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा सकता है।
उपरोक्त अधिकारियों से यह स्पष्ट करने के लिए कहा गया है कि ऐसे उत्पाद खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कैसे नियंत्रित किए जाते हैं, क्या वे लेबलिंग आवश्यकताओं को पूरा करते हैं, और उपभोक्ता स्वास्थ्य की रक्षा के लिए कौन से उपाय लागू हैं। न्यायालय यह भी जानना चाहता है कि क्या किसी निर्माता या खुदरा विक्रेता के खिलाफ पहले से कोई प्रवर्तन कार्रवाई की गई है।
यह जाँच पौध‑आधारित पनीर विकल्पों के बढ़ते रुझान के बीच हो रही है। उच्च न्यायालय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को उन उत्पादों के बारे में सटीक जानकारी मिले जिन्हें वे खरीदते हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण मानकों को बनाए रखा जा सके।
न्यायालय ने अधिकारियों को उत्तर देने के लिए एक समय सीमा निर्धारित की है, जिसके बाद वह निर्णय लेगा कि क्या आगे कानूनी कार्रवाई की जाए या यदि अनुपालन संतोषजनक हो तो याचिका को खारिज किया जाए।
उपरोक्त अधिकारियों से यह स्पष्ट करने के लिए कहा गया है कि ऐसे उत्पाद खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कैसे नियंत्रित किए जाते हैं, क्या वे लेबलिंग आवश्यकताओं को पूरा करते हैं, और उपभोक्ता स्वास्थ्य की रक्षा के लिए कौन से उपाय लागू हैं। न्यायालय यह भी जानना चाहता है कि क्या किसी निर्माता या खुदरा विक्रेता के खिलाफ पहले से कोई प्रवर्तन कार्रवाई की गई है।
यह जाँच पौध‑आधारित पनीर विकल्पों के बढ़ते रुझान के बीच हो रही है। उच्च न्यायालय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को उन उत्पादों के बारे में सटीक जानकारी मिले जिन्हें वे खरीदते हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण मानकों को बनाए रखा जा सके।
न्यायालय ने अधिकारियों को उत्तर देने के लिए एक समय सीमा निर्धारित की है, जिसके बाद वह निर्णय लेगा कि क्या आगे कानूनी कार्रवाई की जाए या यदि अनुपालन संतोषजनक हो तो याचिका को खारिज किया जाए।