📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rohit Sharma
राजनीति
अरुणाचल में नई बांध परियोजनाओं पर बहस छिड़ी
✍️ Counterview
🗓 28 अग. 2026, 03:18 PM
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पर्यावरणविद् और नीति निर्माताओं ने अरुणाचल में बांध निर्माण को ‘प्रकृति के खिलाफ युद्ध’ कहकर पुनर्विचार की मांग की है।
अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित नई बांध परियोजनाओं को लेकर पर्यावरण संगठनों और राज्य अधिकारियों के बीच तीव्र बहस चल रही है। ‘प्रकृति के खिलाफ युद्ध’ की अभिव्यक्ति के साथ वे चेतावनी दे रहे हैं कि बिना उचित मूल्यांकन के निर्माण से नदियों के प्रवाह, जैव विविधता और स्थानीय जनजीवन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
बांधों के समर्थक तर्क देते हैं कि जलविद्युत ऊर्जा प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। परन्तु आलोचक कहते हैं कि इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और भूकंपीय संवेदनशीलता को देखते हुए पर्यावरणीय लागत लाभ से अधिक है।
इस कारण नीति निर्माताओं के बीच व्यापक पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को अनिवार्य करने की मांग बढ़ रही है। सभी पक्ष एक संतुलित समाधान की ओर इशारा कर रहे हैं, जिससे विकास के साथ‑साथ अरुणाचल की प्राकृतिक धरोहर की रक्षा भी सुनिश्चित हो सके।
बांधों के समर्थक तर्क देते हैं कि जलविद्युत ऊर्जा प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। परन्तु आलोचक कहते हैं कि इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और भूकंपीय संवेदनशीलता को देखते हुए पर्यावरणीय लागत लाभ से अधिक है।
इस कारण नीति निर्माताओं के बीच व्यापक पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को अनिवार्य करने की मांग बढ़ रही है। सभी पक्ष एक संतुलित समाधान की ओर इशारा कर रहे हैं, जिससे विकास के साथ‑साथ अरुणाचल की प्राकृतिक धरोहर की रक्षा भी सुनिश्चित हो सके।