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01 अक्टू. 2026•
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कोर्ट ने कहा पत्नी की घरजमै बनना चाहने की इच्छा क्रूरता नहीं
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Chiranjeevi.anisetti
धर्म

कोर्ट ने कहा पत्नी की घरजमै बनना चाहने की इच्छा क्रूरता नहीं

✍️ Verdictum 🗓 01 अक्टू. 2026, 12:01 AM 👁 15
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एक हालिया भारतीय कोर्ट के फैसले ने कहा कि पत्नी की पति को घरजमै बनाना चाहने की इच्छा हिंदू विवाह अधिनियम के तहत क्रूरता नहीं मानी जाएगी।

एक भारतीय न्यायालय ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत "क्रूरता" की कानूनी परिभाषा को स्पष्ट करने वाला फैसला सुनाया। इस मामले में पत्नी ने यह तर्क दिया था कि पति का घरजमै बनने से इनकार करना, अर्थात् पत्नी के परिवार के साथ रहने की इच्छा, क्रूरता का आधार है और तलाक का कारण बन सकता है।

न्यायालय ने कहा कि केवल पति को घरजमै बनना चाहने की इच्छा को क्रूरता नहीं माना जा सकता। क्रूरता का अर्थ वह व्यवहार है जो जीवन, सुरक्षा या सम्मान को खतरे में डालता है, जो इस मामले में स्थापित नहीं हुआ।

इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि घर के प्रबंधन या रहने की व्यवस्था से जुड़ी व्यक्तिगत पसंद को तलाक के कारण के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता। वकीलों और परिवारों को सलाह दी गई है कि ऐसे मतभेदों को आपसी सहमति के माध्यम से सुलझाया जाए, न कि कानूनी रूप से समाप्ति के आधार बनाकर।

यह रुख यह स्थापित करता है कि वैवाहिक विवादों को ठोस दुरुपयोग या उपेक्षा के प्रमाणों के आधार पर ही तलाक के लिए प्रस्तुत किया जाना चाहिए, न कि केवल रहने की व्यवस्था के बारे में अलग-अलग अपेक्षाओं के कारण।
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