📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Afser Ali
राजनीति
कोर्ट ने तमिलनाडु के 1,200 करोड़ रुपये के सचिवालय योजना को खारिज किया
✍️ India Today
🗓 05 अक्टू. 2026, 07:36 PM
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एक अदालत ने तमिलनाडु सरकार की 1,200 करोड़ रुपये की सचिवालय योजना को चुनौती देने वाले याचिका को खारिज कर दिया, जिससे परियोजना आगे बढ़ेगी।
तमिलनाडु सरकार की नई सचिवालय योजना, जिसकी लागत 1,200 करोड़ रुपये निर्धारित है, को लेकर दायर की गई याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। इस फैसले से परियोजना को आगे बढ़ाने में कोई कानूनी अड़चन नहीं रहेगी और निर्माण तथा संबंधित खरीद कार्य जारी रहेंगे।
याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि योजना में कुछ प्रक्रिया संबंधी त्रुटियां हैं, परंतु अदालत ने यह पाया कि सरकार ने आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया है और हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई, जिससे प्रशासनिक नीतियों में न्यायालय की भूमिका सीमित रहने का संकेत मिलता है।
राज्य के प्रतिनिधियों ने इस निर्णय का स्वागत किया, यह कहते हुए कि नया सचिवालय प्रशासनिक कार्यक्षमता को बढ़ाएगा और बढ़ती स्टाफ़ जरूरतों को पूरा करेगा। चेन्नई में निर्माण होने वाली इस योजना से रोजगार सृजन और संबंधित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, हालांकि विस्तृत समय‑सारिणी अभी घोषित नहीं की गई है।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान में यह फैसला योजना को साफ़ रास्ता देता है, पर भविष्य में नई जानकारी या सार्वजनिक हित के मुद्दों के आधार पर फिर से चुनौती दी जा सकती है। अभी के लिए सरकार को 1,200 करोड़ रुपये की निवेश योजना में अदालत द्वारा लगाए गए किसी भी विलंब का सामना नहीं करना पड़ेगा।
याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि योजना में कुछ प्रक्रिया संबंधी त्रुटियां हैं, परंतु अदालत ने यह पाया कि सरकार ने आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया है और हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई, जिससे प्रशासनिक नीतियों में न्यायालय की भूमिका सीमित रहने का संकेत मिलता है।
राज्य के प्रतिनिधियों ने इस निर्णय का स्वागत किया, यह कहते हुए कि नया सचिवालय प्रशासनिक कार्यक्षमता को बढ़ाएगा और बढ़ती स्टाफ़ जरूरतों को पूरा करेगा। चेन्नई में निर्माण होने वाली इस योजना से रोजगार सृजन और संबंधित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, हालांकि विस्तृत समय‑सारिणी अभी घोषित नहीं की गई है।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान में यह फैसला योजना को साफ़ रास्ता देता है, पर भविष्य में नई जानकारी या सार्वजनिक हित के मुद्दों के आधार पर फिर से चुनौती दी जा सकती है। अभी के लिए सरकार को 1,200 करोड़ रुपये की निवेश योजना में अदालत द्वारा लगाए गए किसी भी विलंब का सामना नहीं करना पड़ेगा।