📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Supreme Court of India
देश
संविधान को ही मार्गदर्शक बनाना चाहिए जब कानून में स्पष्टता न हो, सीजेआई सूर्यकांत
✍️ The Meghalayan Express
🗓 31 अक्टू. 2026, 01:30 AM
👁 18
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि जब कानून में स्पष्टता नहीं होती, तो संविधान को ही न्यायपालिका का मार्गदर्शक बनना चाहिए।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हाल ही में कहा कि जब विधायी कानून स्पष्ट नहीं होता या अनुपलब्ध रहता है, तो संविधान को ही अदालतों का प्राथमिक संदर्भ बनना चाहिए। उन्होंने बताया कि संविधान के मूलभूत अधिकार और व्यापक सिद्धांत विधायी अंतर को भरते हैं, जिससे न्याय की कमी नहीं होती।
सीजेआई ने सभी स्तरों के न्यायाधीशों से आग्रह किया कि वे नई या जटिल मामलों का सामना करते समय संविधान की धारा और स्थापित न्यायशास्त्र को देखें। इस प्रकार न्यायपालिका लोकतांत्रिक ढांचे का सम्मान करते हुए कानून के शासन को बनाए रखेगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक, पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में जहाँ विधायी प्रावधान अक्सर पीछे रह जाते हैं, वहाँ इस दिशा-निर्देश की आवश्यकता अधिक है। सूर्यकांत का यह बयान संविधान को एक जीवंत दस्तावेज़ के रूप में व्याख्या करने की न्यायपालिका की जिम्मेदारी को दोहराता है, जो पूरे भारत में अधिकारों और स्वतंत्रताओं की रक्षा करता है।
सीजेआई ने सभी स्तरों के न्यायाधीशों से आग्रह किया कि वे नई या जटिल मामलों का सामना करते समय संविधान की धारा और स्थापित न्यायशास्त्र को देखें। इस प्रकार न्यायपालिका लोकतांत्रिक ढांचे का सम्मान करते हुए कानून के शासन को बनाए रखेगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक, पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में जहाँ विधायी प्रावधान अक्सर पीछे रह जाते हैं, वहाँ इस दिशा-निर्देश की आवश्यकता अधिक है। सूर्यकांत का यह बयान संविधान को एक जीवंत दस्तावेज़ के रूप में व्याख्या करने की न्यायपालिका की जिम्मेदारी को दोहराता है, जो पूरे भारत में अधिकारों और स्वतंत्रताओं की रक्षा करता है।