📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / HariSinghw
राजनीति
बूंदी में बोर्ड गठन पर डोटासरा और जूली ने भाजपा पर राजनीति का आरोप
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 19 सित. 2026, 08:00 PM
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कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राजस्थान सरकार द्वारा बूंदी में निकाय बोर्ड गठन को राजनीतिक साधन बनाने का आरोप लगाया।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बृहस्पतिवार को बूंदी पहुंचकर निकाय बोर्ड गठन को लेकर प्रेस ब्रीफ़िंग की। दोनों नेताओं ने भाजपा‑शासन को इस प्रशासनिक प्रक्रिया को अपने पक्ष में मोड़ने का आरोप लगाया।
डोटासरा का कहना है कि बोर्ड की समयसारिणी और सदस्य चयन को जानबूझकर ruling party के सहयोगियों को लाभ पहुँचाने के लिये तैयार किया गया, जिससे विपक्षी प्रतिनिधियों को बाहर रखा गया। जूली ने भी इसी तरह की टिप्पणी की, यह कहते हुए कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक सिद्धांतों को कमजोर करती है और राजस्थान में स्थानीय निकायों के राजनीतिकरण का एक और उदाहरण है।
भाजपा और राजस्थान सरकार ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद आगामी स्थानीय चुनावों से पहले राजनीतिक तनाव को बढ़ा सकता है।
जिस बोर्ड का उल्लेख किया गया है, वह बूंदी जिले में विकास परियोजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं की देखरेख करता है, इसलिए इसकी निष्पक्ष कार्यवाही स्थानीय शासन के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण है। दोनों कांग्रेस नेताओं ने पारदर्शी समीक्षा और राजनीतिक हस्तक्षेप के बिना बोर्ड गठन की मांग की है।
यह घटना राज्य में प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर ruling party और विपक्ष के बीच चल रहे विवादों में एक नया अध्याय जोड़ती है, जो राजस्थान में केंद्र‑राज्य और पार्टी संबंधों की जटिलताओं को उजागर करती है।
डोटासरा का कहना है कि बोर्ड की समयसारिणी और सदस्य चयन को जानबूझकर ruling party के सहयोगियों को लाभ पहुँचाने के लिये तैयार किया गया, जिससे विपक्षी प्रतिनिधियों को बाहर रखा गया। जूली ने भी इसी तरह की टिप्पणी की, यह कहते हुए कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक सिद्धांतों को कमजोर करती है और राजस्थान में स्थानीय निकायों के राजनीतिकरण का एक और उदाहरण है।
भाजपा और राजस्थान सरकार ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद आगामी स्थानीय चुनावों से पहले राजनीतिक तनाव को बढ़ा सकता है।
जिस बोर्ड का उल्लेख किया गया है, वह बूंदी जिले में विकास परियोजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं की देखरेख करता है, इसलिए इसकी निष्पक्ष कार्यवाही स्थानीय शासन के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण है। दोनों कांग्रेस नेताओं ने पारदर्शी समीक्षा और राजनीतिक हस्तक्षेप के बिना बोर्ड गठन की मांग की है।
यह घटना राज्य में प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर ruling party और विपक्ष के बीच चल रहे विवादों में एक नया अध्याय जोड़ती है, जो राजस्थान में केंद्र‑राज्य और पार्टी संबंधों की जटिलताओं को उजागर करती है।