📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / AAPPilibhit
राजनीति
कांग्रेस ने एएपी‑जीएफपी गठबंधन पर भाजपा के साथ मौन समझौते का आरोप लगाया
✍️ newstodaynet.com
🗓 16 सित. 2026, 12:37 PM
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कांग्रेस ने एएपी‑जीएफपी गठबंधन पर भाजपा के साथ मौन समझौते का आरोप लगाया है।
कांग्रेस पार्टी ने एएपी‑जीएफपी गठबंधन पर भाजपा के साथ मौन समझौते का आरोप लगाया है। यह आरोप नई दिल्ली में कांग्रेस के नेताओं द्वारा आयोजित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान सार्वजनिक किया गया, जिसमें कहा गया कि यह गठबंधन स्वतंत्र नहीं बल्कि भाजपा के राजनीतिक एजेंडा के साथ समन्वित है।
कांग्रेस के प्रवक्ता के अनुसार, एएपी‑जीएफपी साझेदारी का गठन विपक्षी पार्टियों के खिलाफ एकीकृत मोर्चा बनाने के उद्देश्य से किया गया था, परंतु यह कथित तौर पर प्रमुख नीति मामलों में भाजपा के साथ समन्वय करके किया जा रहा है। उन्होंने एएपी और जीएफपी के नेताओं के हालिया बयानों का हवाला देते हुए इस साझा राजनीतिक रणनीति का उल्लेख किया।
एएपी और जीएफपी ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनका गठबंधन केवल सामान्य नीति उद्देश्यों और शासन के साझा दृष्टिकोण पर आधारित है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि कांग्रेस के ये दावे राजनीतिक प्रेरित हैं और साक्ष्यहीन हैं।
यह विवाद उस समय सामने आया है जब एएपी‑जीएफपी गठबंधन आगामी राज्य चुनावों की तैयारी कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के ये आरोप मतदाता धारणा और क्षेत्रीय राजनीतिक गतिशीलता को प्रभावित कर सकते हैं।
दोनों पार्टियों ने दावों की जाँच के लिए एक तटस्थ जांच की मांग की है, जबकि भाजपा ने इस विषय पर मौन बना हुआ है।
कांग्रेस के प्रवक्ता के अनुसार, एएपी‑जीएफपी साझेदारी का गठन विपक्षी पार्टियों के खिलाफ एकीकृत मोर्चा बनाने के उद्देश्य से किया गया था, परंतु यह कथित तौर पर प्रमुख नीति मामलों में भाजपा के साथ समन्वय करके किया जा रहा है। उन्होंने एएपी और जीएफपी के नेताओं के हालिया बयानों का हवाला देते हुए इस साझा राजनीतिक रणनीति का उल्लेख किया।
एएपी और जीएफपी ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनका गठबंधन केवल सामान्य नीति उद्देश्यों और शासन के साझा दृष्टिकोण पर आधारित है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि कांग्रेस के ये दावे राजनीतिक प्रेरित हैं और साक्ष्यहीन हैं।
यह विवाद उस समय सामने आया है जब एएपी‑जीएफपी गठबंधन आगामी राज्य चुनावों की तैयारी कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के ये आरोप मतदाता धारणा और क्षेत्रीय राजनीतिक गतिशीलता को प्रभावित कर सकते हैं।
दोनों पार्टियों ने दावों की जाँच के लिए एक तटस्थ जांच की मांग की है, जबकि भाजपा ने इस विषय पर मौन बना हुआ है।