📷 चित्र स्रोत: The Hindu (via NewsData)
शिक्षा
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने स्कूल सुविधाओं को सुधारने की मांग की, वोट‑बैंकिंग से पहले
✍️ The Hindu
🗓 20 अग. 2026, 04:41 PM
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सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने राजनीतिक नेताओं से कहा कि वोट‑बैंकिंग से पहले सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना चाहिए, क्योंकि अभी तक मंत्री‑पदस्थों के कुत्तों को भी बेहतर सुविधा मिलती है।
सीजेपी (सेंटर फॉर जस्टिस एंड पॉलिसी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शिक्षा कार्यकर्ताओं के सामने कहा कि राजनीतिक दलों को चुनावी मोर्चे पर निकलने से पहले सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को सुधारना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई सरकारी स्कूलों की हालत इतनी खराब है कि मंत्री‑पदस्थों के कुत्तों को भी बेहतर सुविधा मिलती है।
दिपके ने शिक्षा को मौलिक अधिकार कहा और कहा कि स्कूलों की उपेक्षा भविष्य की पीढ़ी को नुकसान पहुँचाती है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे निर्वाचित प्रतिनिधियों को जवाबदेह ठहराएँ और राजनीतिक नेताओं को वोट‑बैंकिंग से पहले शिक्षा सुधार पर काम करने के लिए मजबूर करें।
यह बयान देश भर में सरकारी स्कूलों में निधि, रख‑रखाव और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर बढ़ते आलोचना के बीच आया है। जबकि उन्होंने कोई विशिष्ट नीति प्रस्ताव नहीं दिया, दिपके का उद्देश्य पार्टियों को आगामी चुनाव में शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए दबाव बनाना है।
शिक्षा विशेषज्ञों ने इस बात का स्वागत किया कि राजनीतिक इच्छाशक्ति के बिना शिक्षक प्रशिक्षण, कक्षा सामग्री और शौचालय व पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार संभव नहीं है।
सीजेपी ने कहा है कि वह राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया को नज़र में रखेगा और यदि सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली में वास्तविक सुधार नहीं हुआ तो जन समर्थन जुटाएगा।
दिपके ने शिक्षा को मौलिक अधिकार कहा और कहा कि स्कूलों की उपेक्षा भविष्य की पीढ़ी को नुकसान पहुँचाती है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे निर्वाचित प्रतिनिधियों को जवाबदेह ठहराएँ और राजनीतिक नेताओं को वोट‑बैंकिंग से पहले शिक्षा सुधार पर काम करने के लिए मजबूर करें।
यह बयान देश भर में सरकारी स्कूलों में निधि, रख‑रखाव और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर बढ़ते आलोचना के बीच आया है। जबकि उन्होंने कोई विशिष्ट नीति प्रस्ताव नहीं दिया, दिपके का उद्देश्य पार्टियों को आगामी चुनाव में शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए दबाव बनाना है।
शिक्षा विशेषज्ञों ने इस बात का स्वागत किया कि राजनीतिक इच्छाशक्ति के बिना शिक्षक प्रशिक्षण, कक्षा सामग्री और शौचालय व पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार संभव नहीं है।
सीजेपी ने कहा है कि वह राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया को नज़र में रखेगा और यदि सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली में वास्तविक सुधार नहीं हुआ तो जन समर्थन जुटाएगा।