📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Supreme Court of India
देश
सीजेआई सूर्य कांत ने कहा, कानूनी सहायता दूरदराज़ क्षेत्रों तक पहुँचे
✍️ The Times of India
🗓 03 नव. 2026, 09:36 AM
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भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि कानूनी सेवाएँ देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने हालिया प्रेस ब्रीफ़िंग में कहा कि देश के सबसे दूरस्थ इलाकों में कानूनी सहायता पहुंचाना अत्यावश्यक है। उन्होंने बताया कि जनजातीय क्षेत्रों, पहाड़ी इलाकों और दूरस्थ गांवों में लाखों नागरिकों को बुनियादी न्यायिक सहायता से वंचित रहना पड़ता है।
सीजेआई ने कहा कि संविधान में निहित कानूनी सहायता का अधिकार तभी सार्थक होगा जब यह दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचे। उन्होंने शहरी न्यायालयों की पर्याप्त सुविधाओं और दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों को सुनवाई के लिए सैकड़ों किलोमीटर यात्रा करनी पड़ने की असमानता को उजागर किया।
सूर्य कांत ने केंद्र‑राज्य सरकारों, न्यायपालिका और नागरिक संगठनों से समन्वित रणनीतियों, जैसे मोबाइल कोर्ट, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और सामुदायिक कानूनी क्लीनिक स्थापित करने का आग्रह किया। उन्होंने तकनीक के उपयोग से अंतर को पाटने और कमजोर वर्गों को योग्य प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने चेतावनी दी कि ठोस कदम नहीं उठाए गए तो ‘सबके लिए न्याय’ का वादा अधूरा रहेगा और न्याय प्रणाली में सार्वजनिक विश्वास कमज़ोर पड़ जाएगा।
सीजेआई ने कहा कि संविधान में निहित कानूनी सहायता का अधिकार तभी सार्थक होगा जब यह दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचे। उन्होंने शहरी न्यायालयों की पर्याप्त सुविधाओं और दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों को सुनवाई के लिए सैकड़ों किलोमीटर यात्रा करनी पड़ने की असमानता को उजागर किया।
सूर्य कांत ने केंद्र‑राज्य सरकारों, न्यायपालिका और नागरिक संगठनों से समन्वित रणनीतियों, जैसे मोबाइल कोर्ट, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और सामुदायिक कानूनी क्लीनिक स्थापित करने का आग्रह किया। उन्होंने तकनीक के उपयोग से अंतर को पाटने और कमजोर वर्गों को योग्य प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने चेतावनी दी कि ठोस कदम नहीं उठाए गए तो ‘सबके लिए न्याय’ का वादा अधूरा रहेगा और न्याय प्रणाली में सार्वजनिक विश्वास कमज़ोर पड़ जाएगा।