📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sridhar Elangovan
शिक्षा
सीजेआई ने पाठ्यपुस्तक त्रुटि पर ओडिशा मंत्री के इस्तीफे की मांग करने वाले छात्र आंदोलन का समर्थन किया
✍️ orissapost.com
🗓 22 सित. 2026, 04:17 AM
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भारत के मुख्य न्यायाधीश ने पाठ्यपुस्तक त्रुटि को लेकर ओडिशा मंत्री के इस्तीफे की मांग करने वाले छात्र आंदोलन का समर्थन किया है।
नई दिल्ली – भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) ने ओडिशा में छात्रों द्वारा आयोजित एक आंदोलन का समर्थन किया है, जिसमें एक पाठ्यपुस्तक त्रुटि को लेकर राज्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही है। छात्रों का कहना है कि मंत्री के विभाग ने शैक्षणिक सामग्री की सटीकता सुनिश्चित नहीं की, जिससे कक्षा में गलत जानकारी फैली।
सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक मंच पर जारी बयान में सीजेआई ने शैक्षिक अखंडता के महत्व पर बल दिया और त्वरित सुधारात्मक कदमों की अपील की। उन्होंने कहा कि पाठ्यपुस्तक की शुद्धता संवैधानिक दायित्व है और इसका उल्लंघन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार को कमजोर करता है।
इस हफ्ते शुरू हुए इस प्रदर्शन को राज्य भर में व्यापक मीडिया कवरेज मिला है। जबकि मंत्री ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, विपक्षी दलों ने भी छात्रों की मांगों को दोहराते हुए जवाबदेही और पाठ्यपुस्तक अनुमोदन प्रक्रिया की पूरी जाँच की मांग की है।
ओडिशा के शिक्षा विभाग ने त्रुटि की जांच के लिए एक समिति गठित करने और सुधारात्मक उपाय सुझाने का ऐलान किया है। सीजेआई के समर्थन से राज्य सरकार पर तेज़ी से कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है, जो नागरिक आंदोलन के लिए न्यायिक समर्थन का एक दुर्लभ उदाहरण है।
स्थिति अभी भी बदलती हुई है, और जांच के परिणाम तथा छात्रों के आगे के कदमों के साथ नई जानकारी सामने आने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक मंच पर जारी बयान में सीजेआई ने शैक्षिक अखंडता के महत्व पर बल दिया और त्वरित सुधारात्मक कदमों की अपील की। उन्होंने कहा कि पाठ्यपुस्तक की शुद्धता संवैधानिक दायित्व है और इसका उल्लंघन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार को कमजोर करता है।
इस हफ्ते शुरू हुए इस प्रदर्शन को राज्य भर में व्यापक मीडिया कवरेज मिला है। जबकि मंत्री ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, विपक्षी दलों ने भी छात्रों की मांगों को दोहराते हुए जवाबदेही और पाठ्यपुस्तक अनुमोदन प्रक्रिया की पूरी जाँच की मांग की है।
ओडिशा के शिक्षा विभाग ने त्रुटि की जांच के लिए एक समिति गठित करने और सुधारात्मक उपाय सुझाने का ऐलान किया है। सीजेआई के समर्थन से राज्य सरकार पर तेज़ी से कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है, जो नागरिक आंदोलन के लिए न्यायिक समर्थन का एक दुर्लभ उदाहरण है।
स्थिति अभी भी बदलती हुई है, और जांच के परिणाम तथा छात्रों के आगे के कदमों के साथ नई जानकारी सामने आने की संभावना है।