📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Milad A380 talk?
विदेश
चीन ने 2020 गैलवान टकराव के बाद यूएस एंवॉय गोअर की लद्दाख यात्रा पर विरोध जताया
✍️ Mid-Day
🗓 21 अग. 2026, 04:19 AM
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चीन ने यूएस एंवॉय गोअर की लद्दाख यात्रा पर विरोध दर्ज किया, जो 2020 गैलवान टकराव के बाद पहली बार है।
बीजिंग ने यूएस एंवॉय गोअर की लद्दाख क्षेत्र की हालिया यात्रा पर औपचारिक असंतोष जताया है। यह यात्रा, जो लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के तनावपूर्ण माहौल में हुई, 2020 के गैलवान घाटी टकराव के बाद पहली बार अमेरिकी प्रतिनिधि द्वारा की गई है।
चीनी कूटनीतिक चैनलों ने इस कदम को द्विपक्षीय सीमा विवाद में अनावश्यक हस्तक्षेप बताया और चेतावनी दी कि ऐसी कार्रवाइयाँ चीन‑अमेरिका संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकती हैं। अधिकारियों ने कहा कि इस क्षेत्र में किसी भी विदेशी उपस्थिति को स्थिति‑स्थिरता और भारत‑चीन के चल रहे वार्तालापों का सम्मान करना चाहिए।
संयुक्त राज्य ने एंवॉय की यात्रा के विवरण पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की, पर यह कदम हिमालयी सीमा की रणनीतिक महत्ता में वाशिंगटन की बढ़ती रुचि को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा का समय भारत और अमेरिका के बीच व्यापक कूटनीतिक संपर्कों के साथ मेल खाता है।
भारत ने एंवॉय की गतिविधियों पर विस्तृत बयान नहीं दिया, लेकिन यह रुख बरकरार रखा है कि लद्दाख भारतीय प्रशासन के तहत है और सभी पक्षों से स्थिति को बिगड़ने से बचने की अपील की गई है।
यह घटना क्षेत्रीय सुरक्षा के जटिल परस्पर संबंधों में एक नया आयाम जोड़ती है, जहाँ 2020 के गैलवान टकराव की स्मृति अभी भी दोनों देशों की कूटनीतिक रणनीतियों को प्रभावित कर रही है।
चीनी कूटनीतिक चैनलों ने इस कदम को द्विपक्षीय सीमा विवाद में अनावश्यक हस्तक्षेप बताया और चेतावनी दी कि ऐसी कार्रवाइयाँ चीन‑अमेरिका संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकती हैं। अधिकारियों ने कहा कि इस क्षेत्र में किसी भी विदेशी उपस्थिति को स्थिति‑स्थिरता और भारत‑चीन के चल रहे वार्तालापों का सम्मान करना चाहिए।
संयुक्त राज्य ने एंवॉय की यात्रा के विवरण पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की, पर यह कदम हिमालयी सीमा की रणनीतिक महत्ता में वाशिंगटन की बढ़ती रुचि को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा का समय भारत और अमेरिका के बीच व्यापक कूटनीतिक संपर्कों के साथ मेल खाता है।
भारत ने एंवॉय की गतिविधियों पर विस्तृत बयान नहीं दिया, लेकिन यह रुख बरकरार रखा है कि लद्दाख भारतीय प्रशासन के तहत है और सभी पक्षों से स्थिति को बिगड़ने से बचने की अपील की गई है।
यह घटना क्षेत्रीय सुरक्षा के जटिल परस्पर संबंधों में एक नया आयाम जोड़ती है, जहाँ 2020 के गैलवान टकराव की स्मृति अभी भी दोनों देशों की कूटनीतिक रणनीतियों को प्रभावित कर रही है।