📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Jan Miense Molenaer
स्थानीय
सेवा आश्रम के बच्चों ने बनाई अनोखी राखियों, दिखाया हुनर और आत्मविश्वास
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 22 अग. 2026, 09:14 AM
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रजस्थानी सेवा आश्रम के बच्चों ने अनोखी राखियों का निर्माण किया, जिससे उनका हुनर और आत्मविश्वास झलकता है।
राजस्थान के सेवा आश्रम ने अपने बच्चों को राखी बनाने की कला सिखाकर उन्हें कुशल कारीगर बना दिया है। आश्रम के कर्मचारियों के मार्गदर्शन में बच्चे पारंपरिक तकनीकों और स्थानीय सामग्री का उपयोग करके प्रत्येक राखी को अनोखा रूप देते हैं, जिससे साधारण धागे में रचनात्मकता की चमक आती है।
यह पहल बच्चों को उद्देश्य और आत्म‑सम्मान प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी और जल्दी ही आश्रम की दैनिक गतिविधियों में एक पहचान बन गई है। भागीदार बताते हैं कि इस प्रक्रिया से उन्हें सीखने का अवसर मिलता है और तैयार हुई राखियों में उनका मेहनत और लगन झलकती है।
स्थानीय लोग और आगंतुक अब इन राखियों को आश्रम के बच्चों की विशेष पहचान मानते हैं, अक्सर इन्हें उपहार या स्मृति चिन्ह के रूप में खरीदते हैं। इस बढ़ते रुचि से न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि आश्रम के कल्याण कार्यों के लिए मामूली आय भी उत्पन्न होती है।
एक सांस्कृतिक परम्परा को सशक्तिकरण के साधन में बदलकर सेवा आश्रम यह सिद्ध करता है कि साधारण शिल्प भी कमजोर वर्ग के युवाओं में कौशल विकास और आत्म‑विश्वास को पोषित कर सकते हैं।
यह पहल बच्चों को उद्देश्य और आत्म‑सम्मान प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी और जल्दी ही आश्रम की दैनिक गतिविधियों में एक पहचान बन गई है। भागीदार बताते हैं कि इस प्रक्रिया से उन्हें सीखने का अवसर मिलता है और तैयार हुई राखियों में उनका मेहनत और लगन झलकती है।
स्थानीय लोग और आगंतुक अब इन राखियों को आश्रम के बच्चों की विशेष पहचान मानते हैं, अक्सर इन्हें उपहार या स्मृति चिन्ह के रूप में खरीदते हैं। इस बढ़ते रुचि से न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि आश्रम के कल्याण कार्यों के लिए मामूली आय भी उत्पन्न होती है।
एक सांस्कृतिक परम्परा को सशक्तिकरण के साधन में बदलकर सेवा आश्रम यह सिद्ध करता है कि साधारण शिल्प भी कमजोर वर्ग के युवाओं में कौशल विकास और आत्म‑विश्वास को पोषित कर सकते हैं।