📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / swap
धर्म
छत्तीसगढ़ के धर्म परिवर्तन विरोधी कानून को कोर्ट में मिला चुनौती
✍️ International Christian Concern
🗓 14 अक्टू. 2026, 12:32 PM
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एक धार्मिक अधिकार समूह द्वारा दायर याचिका ने छत्तीसगढ़ के धर्म परिवर्तन विरोधी कानून की संवैधानिकता पर सवाल उठाया, जिससे राज्य उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई।
एक धार्मिक अधिकार समूह ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है, जिसमें वह राज्य के धर्म परिवर्तन विरोधी कानून को संविधान के धार्मिक स्वतंत्रता प्रावधानों के विरुद्ध बताकर निरस्त करने की मांग कर रहा है। यह कानून उन रूपांतरणों को दंडनीय मानता है जो बल, धोखा या प्रलोभन के माध्यम से किए जाते हैं, और परिवर्तन करने वाले को पहले से अनुमति लेने की आवश्यकता रखता है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित इस कानून को आलोचकों ने अस्पष्ट और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ दुरुपयोग की संभावना वाला बताया है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य सरकार को विस्तृत उत्तर देने का निर्देश दिया, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि यह विधि संवैधानिक सुरक्षा के साथ कैसे मेल खाती है। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले का निर्णय अन्य राज्यों में समान कानूनों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
मानवाधिकार संगठनों ने इस चुनौती का स्वागत किया है, यह कहते हुए कि यह भारत के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों को पुनः स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है। इस मामले का परिणाम देश भर में नागरिक समाज और राजनैतिक नेताओं दोनों की करीबी निगरानी में रहेगा।
छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित इस कानून को आलोचकों ने अस्पष्ट और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ दुरुपयोग की संभावना वाला बताया है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य सरकार को विस्तृत उत्तर देने का निर्देश दिया, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि यह विधि संवैधानिक सुरक्षा के साथ कैसे मेल खाती है। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले का निर्णय अन्य राज्यों में समान कानूनों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
मानवाधिकार संगठनों ने इस चुनौती का स्वागत किया है, यह कहते हुए कि यह भारत के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों को पुनः स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है। इस मामले का परिणाम देश भर में नागरिक समाज और राजनैतिक नेताओं दोनों की करीबी निगरानी में रहेगा।