📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Charles J. Sharp
कृषि
छत्तीसगढ़ में हाथियों के मल से बीजों से वनों का पुनरुद्धार
✍️ The Times of India
🗓 08 जुल. 2026, 01:46 AM
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छत्तीसगढ़ ने हाथियों के मल में पाए जाने वाले बीजों का उपयोग करके वनों के विकास को बढ़ावा देने के लिए एक अभिनव रणनीति शुरू की है। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य जंगल क्षेत्रों के भीतर भोजन स्रोतों को बनाए रखना है, जिससे हाथियों को मानव बस्तियों में जाने की आवश्यकता कम हो सके।
छत्तीसगढ़ राज्य में हाथियों की आबादी के प्रबंधन और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए एक नई रणनीति लागू की जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य हाथी के मल में मौजूद बीजों का उपयोग करके वन क्षेत्रों का पुनरुद्धार करना है।
इसका प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हाथियों को उनके प्राकृतिक आवास के भीतर पर्याप्त भोजन संसाधन उपलब्ध हों। जंगलों के अंदर पेड़ों और वनस्पतियों के विकास को प्रोत्साहित करके, राज्य हाथियों द्वारा भोजन की तलाश में कृषि क्षेत्रों और मानव बस्तियों की ओर पलायन करने की घटनाओं को कम करने का लक्ष्य रखता है।
यह विधि हाथियों द्वारा बीजों के प्राकृतिक फैलाव का लाभ उठाती है, जिससे उनकी उपस्थिति के एक उप-उत्पाद को पारिस्थितिक बहाली और संघर्ष निवारण के एक उपकरण में बदल दिया जाता है। इस पहल से हाथियों के संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भलाई दोनों में योगदान मिलने की उम्मीद है।
इसका प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हाथियों को उनके प्राकृतिक आवास के भीतर पर्याप्त भोजन संसाधन उपलब्ध हों। जंगलों के अंदर पेड़ों और वनस्पतियों के विकास को प्रोत्साहित करके, राज्य हाथियों द्वारा भोजन की तलाश में कृषि क्षेत्रों और मानव बस्तियों की ओर पलायन करने की घटनाओं को कम करने का लक्ष्य रखता है।
यह विधि हाथियों द्वारा बीजों के प्राकृतिक फैलाव का लाभ उठाती है, जिससे उनकी उपस्थिति के एक उप-उत्पाद को पारिस्थितिक बहाली और संघर्ष निवारण के एक उपकरण में बदल दिया जाता है। इस पहल से हाथियों के संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भलाई दोनों में योगदान मिलने की उम्मीद है।