📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sridhar Elangovan
अपराध
छत्तीसगढ़ एचसी के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने बाल‑केंद्रित पुनर्स्थापना न्याय प्रणाली की मांग की
✍️ Law Trend
🗓 30 अग. 2026, 08:04 PM
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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने बाल‑केंद्रित, पुनर्स्थापना और दयालुता पर आधारित नाबालिग न्याय प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने नाबालिग न्याय प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कानून के दायरे में आए बच्चों को परिस्थितियों का शिकार मानते हुए दंडात्मक उपायों की बजाय पुनर्वास पर ज़ोर देना चाहिए।
न्यायाधीश ने बताया कि बाल‑केंद्रित दृष्टिकोण में पुनर्स्थापना प्रक्रियाएँ शामिल होनी चाहिए, जिससे युवा अपराधी अपने किए हुए नुकसान को ठीक कर समाज में फिर से समाहित हो सकें। यह दिशा‑निर्देश राष्ट्रीय विधि और अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार संधियों के अनुरूप है।
इन टिप्पणियों के साथ ही कानूनी विशेषज्ञों और बाल‑अधिकार संगठनों ने भी नाबालिग मामलों में अधिक दयालुता की मांग की है। उच्च न्यायालय भविष्य में इन सिद्धांतों को लागू करने के लिए प्रक्रिया‑परिवर्तन पर विचार करेगा।
हालाँकि अभी तक कोई विशिष्ट विधायी प्रस्ताव नहीं आया है, लेकिन मुख्य न्यायाधीश की यह अपील नाबालिगों की विकासात्मक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नीतियों में बदलाव का संकेत देती है। राज्य सरकार और न्यायपालिका से ठोस कदमों की अपेक्षा की जा रही है।
पुनर्स्थापना न्याय की ओर यह रुझान भारत के कई न्यायालयों में देखी जा रही प्रवृत्ति को दर्शाता है, जहाँ नाबालिग अपराधियों को जेल में बंद करने के बजाय परामर्श, शिक्षा और सामुदायिक‑आधारित समाधान को प्राथमिकता दी जा रही है।
न्यायाधीश ने बताया कि बाल‑केंद्रित दृष्टिकोण में पुनर्स्थापना प्रक्रियाएँ शामिल होनी चाहिए, जिससे युवा अपराधी अपने किए हुए नुकसान को ठीक कर समाज में फिर से समाहित हो सकें। यह दिशा‑निर्देश राष्ट्रीय विधि और अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार संधियों के अनुरूप है।
इन टिप्पणियों के साथ ही कानूनी विशेषज्ञों और बाल‑अधिकार संगठनों ने भी नाबालिग मामलों में अधिक दयालुता की मांग की है। उच्च न्यायालय भविष्य में इन सिद्धांतों को लागू करने के लिए प्रक्रिया‑परिवर्तन पर विचार करेगा।
हालाँकि अभी तक कोई विशिष्ट विधायी प्रस्ताव नहीं आया है, लेकिन मुख्य न्यायाधीश की यह अपील नाबालिगों की विकासात्मक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नीतियों में बदलाव का संकेत देती है। राज्य सरकार और न्यायपालिका से ठोस कदमों की अपेक्षा की जा रही है।
पुनर्स्थापना न्याय की ओर यह रुझान भारत के कई न्यायालयों में देखी जा रही प्रवृत्ति को दर्शाता है, जहाँ नाबालिग अपराधियों को जेल में बंद करने के बजाय परामर्श, शिक्षा और सामुदायिक‑आधारित समाधान को प्राथमिकता दी जा रही है।