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29 सित. 2026•
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने विवाहित बेटी को मां के मुआवजा दावे से बाहर किया
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ashish.prajapati90
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने विवाहित बेटी को मां के मुआवजा दावे से बाहर किया

✍️ Live Law 🗓 14 सित. 2026, 12:46 PM 👁 55
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि विवाहित बेटी अपनी मां द्वारा दायर कर्मचारियों मुआवजा दावे को जारी नहीं रख सकती, क्योंकि केवल दावेदार ही पात्र है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि कर्मचारियों मुआवजा अधिनियम के तहत मां द्वारा दायर मुआवजा दावे को उसकी विवाहित बेटी जारी नहीं रख सकती। कोर्ट ने कहा कि इस अधिनियम में केवल वह व्यक्ति जो प्रत्यक्ष रूप से क्षति या चोट का शिकार हुआ है, वह ही दावे का हकदार है।

मामले में मां ने कार्यस्थल दुर्घटना के बाद मुआवजा दावा दायर किया था और बाद में अपनी विवाहित बेटी को प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति माँगी। न्यायालय ने इस याचिका को खारिज कर दिया, यह रेखांकित करते हुए कि वैवाहिक स्थिति से दावे का अधिकार नहीं बदलता।

निर्णय यह सिद्ध करता है कि कर्मचारियों मुआवजा अधिनियम के तहत अधिकार केवल दावेदार या उसके कानूनी उत्तराधिकारियों तक सीमित है, और बिना स्पष्ट कानूनी प्रावधान के पति/पत्नी इसे नहीं ले सकते।

इस आदेश से निचली अदालतों और भविष्य में समान पारिवारिक दावों में स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलने की उम्मीद है, जिससे अधिनियम की व्याख्या कड़ी रहेगी।
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