📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
बिज़नेस
केंद्र ने हरियाणा को चार राज्य पावर कंपनियों की स्टॉक लिस्टिंग तेज करने का निर्देश दिया
✍️ Hindustan Times
🗓 29 अक्टू. 2026, 09:15 AM
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केंद्रीय सरकार ने हरियाणा प्रशासन से चार राज्य‑स्वामित्व वाली पावर कंपनियों की सार्वजनिक लिस्टिंग को तेज करने को कहा है, जिससे पूँजी जुटाकर क्षेत्र की दक्षता बढ़ेगी।
केंद्र सरकार ने, ऊर्जा मंत्रालय के माध्यम से, हरियाणा राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि वह अपनी चार राज्य‑स्वामित्व वाली पावर कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट करने की प्रक्रिया को तेज करे।
यह कदम निजी निवेश को आकर्षित करने, कॉर्पोरेट गवर्नेंस को सुदृढ़ करने और राज्य के वित्तीय बोझ को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इन चार कंपनियों, जिनमें हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन आदि शामिल हैं, को निकट भविष्य में प्रारम्भिक सार्वजनिक प्रस्ताव (IPO) के माध्यम से सूचीबद्ध किया जाएगा, बशर्ते नियामक मंजूरी मिल जाए।
हरियाणा के वित्त विभाग को सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) और संबंधित स्टॉक एक्सचेंजों के साथ मिलकर आवश्यक मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया गया है। केंद्र सरकार का मानना है कि लिस्टिंग से पारदर्शिता बढ़ेगी और संपत्तियों का बाजार‑आधारित मूल्यांकन संभव होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है तो अन्य राज्यों के सार्वजनिक क्षेत्र की पावर कंपनियों के लिए भी समान कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर पावर सेक्टर में सुधार को गति मिल सकती है।
यह कदम निजी निवेश को आकर्षित करने, कॉर्पोरेट गवर्नेंस को सुदृढ़ करने और राज्य के वित्तीय बोझ को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इन चार कंपनियों, जिनमें हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन आदि शामिल हैं, को निकट भविष्य में प्रारम्भिक सार्वजनिक प्रस्ताव (IPO) के माध्यम से सूचीबद्ध किया जाएगा, बशर्ते नियामक मंजूरी मिल जाए।
हरियाणा के वित्त विभाग को सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) और संबंधित स्टॉक एक्सचेंजों के साथ मिलकर आवश्यक मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया गया है। केंद्र सरकार का मानना है कि लिस्टिंग से पारदर्शिता बढ़ेगी और संपत्तियों का बाजार‑आधारित मूल्यांकन संभव होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है तो अन्य राज्यों के सार्वजनिक क्षेत्र की पावर कंपनियों के लिए भी समान कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर पावर सेक्टर में सुधार को गति मिल सकती है।