📷 चित्र स्रोत: Flickr (CC)
राजनीति
केंद्र ने जम्मू-कश्मीर किसानों पर 2,205 पीएमकेएसके के प्रभाव पर स्वतंत्र समीक्षा से इनकार किया
✍️ kashmirlife.net
🗓 31 जुल. 2026, 09:35 PM
👁 5
भारतीय सरकार ने जम्मू-कश्मीर के किसानों पर 2,205 पीएमकेएसके योजना के प्रभाव का स्वतंत्र मूल्यांकन न करने का निर्णय लिया, जिससे कृषि हितधारकों में चिंता बढ़ी।
केंद्र ने घोषणा की कि वह जम्मू-कश्मीर में तैनात 2,205 पीएमकेएसके (प्रधानमंत्री किसान सम्मान केन्द्र) इकाइयों के प्रभाव का स्वतंत्र समीक्षा नहीं करेगा। यह योजना, जो किसानों को वित्तीय और सलाहकारी सहायता देने के लिए 2023 की शुरुआत में शुरू की गई थी, अब तक चल रही है।
कृषि मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि योजना के प्रभाव का आंतरिक मूल्यांकन किया जाएगा और बाहरी निरीक्षण आवश्यक नहीं माना गया। यह निर्णय सरकार के पहले के वादों के बाद आया था, जिसमें उन्होंने कार्यक्रम की प्रभावशीलता का आकलन करने का कहा था।
क्षेत्र के किसानों के संघों ने पारदर्शिता की कमी पर चिंता जताई है, यह तर्क देते हुए कि एक स्वतंत्र ऑडिट सेवा वितरण में खामियों को उजागर कर सकता है और भविष्य की नीति समायोजन में मदद कर सकता है। वे डरते हैं कि बिना किसी वस्तुनिष्ठ समीक्षा के, योजना अपने लक्षित लाभों को पूरा नहीं कर पाएगी।
इस कदम ने ग्रामीण विकास पहलों में जवाबदेही के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए हैं, और विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन की अनुपस्थिति किसानों के बीच विश्वास को कमजोर कर सकती है।
कृषि मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि योजना के प्रभाव का आंतरिक मूल्यांकन किया जाएगा और बाहरी निरीक्षण आवश्यक नहीं माना गया। यह निर्णय सरकार के पहले के वादों के बाद आया था, जिसमें उन्होंने कार्यक्रम की प्रभावशीलता का आकलन करने का कहा था।
क्षेत्र के किसानों के संघों ने पारदर्शिता की कमी पर चिंता जताई है, यह तर्क देते हुए कि एक स्वतंत्र ऑडिट सेवा वितरण में खामियों को उजागर कर सकता है और भविष्य की नीति समायोजन में मदद कर सकता है। वे डरते हैं कि बिना किसी वस्तुनिष्ठ समीक्षा के, योजना अपने लक्षित लाभों को पूरा नहीं कर पाएगी।
इस कदम ने ग्रामीण विकास पहलों में जवाबदेही के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए हैं, और विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन की अनुपस्थिति किसानों के बीच विश्वास को कमजोर कर सकती है।