📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / NorthBCSingh
राजनीति
मणिपुर में जनगणना में देरी, एनआरसी तैयारियों पर सवाल
✍️ India Today NE
🗓 22 अग. 2026, 05:38 PM
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मणिपुर में नियोजित जनगणना में देरी हो सकती है, जिससे संभावित एनआरसी के लिए राज्य की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।
मणिपुर के अधिकारियों ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना को स्थगित करने पर विचार किया है, जिससे राज्य के जनसंख्या आँकड़ों के संग्रह में देरी हो सकती है। इस संभावित देरी ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की तैयारी को लेकर नीति निर्माताओं के बीच चर्चा को जन्म दिया है, क्योंकि एनआरसी के लिए नवीनतम जनसंख्या डेटा आवश्यक माना जाता है। जबकि जनगणना संविधानिक दायित्व है, उत्तरपूर्वी क्षेत्र में सुरक्षा और लॉजिस्टिक चुनौतियों को देरी के कारण बताया गया है। अभी तक नई तिथि की पुष्टि नहीं हुई है, पर अधिकारियों ने एनआरसी ढाँचे के साथ तालमेल रखने की आवश्यकता को स्वीकार किया है। यह स्थिति जटिल जातीय संरचना वाले राज्य में सटीक डेटा संग्रह और प्रशासनिक तत्परता के बीच नाज़ुक संतुलन को उजागर करती है।
मणिपुर सरकार को केंद्रीय सांख्यिकीय एजेंसी के साथ मिलकर जनगणना का कैलेंडर अंतिम रूप देना होगा, ताकि किसी भी बदलाव से भविष्य में नागरिक सत्यापन प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित न हो। हितधारक इस बात पर नज़र रख रहे हैं कि राज्य जनगणना और संभावित एनआरसी दोनों को कैसे संभालेगा, क्योंकि दोनों का प्रभाव संसाधन आवंटन और निवासियों की कानूनी स्थिति पर पड़ता है।
यह देरी की चर्चा उत्तरपूर्वी राज्यों की बड़े पैमाने पर डेटा पहलों को संभालने की क्षमता के बारे में व्यापक चिंताओं को भी उजागर करती है, जहाँ बुनियादी ढांचा सीमित है। जैसे-जैसे बहस आगे बढ़ती है, अधिकारी यह कहते हैं कि कोई भी निर्णय विश्वसनीय जनसांख्यिकीय जानकारी और एनआरसी की कानूनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
मणिपुर सरकार को केंद्रीय सांख्यिकीय एजेंसी के साथ मिलकर जनगणना का कैलेंडर अंतिम रूप देना होगा, ताकि किसी भी बदलाव से भविष्य में नागरिक सत्यापन प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित न हो। हितधारक इस बात पर नज़र रख रहे हैं कि राज्य जनगणना और संभावित एनआरसी दोनों को कैसे संभालेगा, क्योंकि दोनों का प्रभाव संसाधन आवंटन और निवासियों की कानूनी स्थिति पर पड़ता है।
यह देरी की चर्चा उत्तरपूर्वी राज्यों की बड़े पैमाने पर डेटा पहलों को संभालने की क्षमता के बारे में व्यापक चिंताओं को भी उजागर करती है, जहाँ बुनियादी ढांचा सीमित है। जैसे-जैसे बहस आगे बढ़ती है, अधिकारी यह कहते हैं कि कोई भी निर्णय विश्वसनीय जनसांख्यिकीय जानकारी और एनआरसी की कानूनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।