धर्म
बीदर: वचनों को जीवन में शामिल करने से बढ़ेगी आत्मसम्मान, संस्कारों पर बल दिया साहित्यकार माणिक नेलगि
बीदर जिले के चिटगुप्पा तालुक में आयोजित विचार ज्योति कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार माणिक नेलगि ने कहा कि शरणाओं के वचनों को जीवन में शामिल करने से न केवल जीवन का मूल्य बढ़ता है बल्कि शांतिपूर्ण जीवन भी संभव होता है।
बीदर जिले के चिटगुप्पा तालुक के निरणा गांव में आयोजित 'निजशरणा अंबीगर चौडय्या विचार ज्योति' कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार माणिक नेलगि ने कहा कि शरणाओं द्वारा दिए गए वचनों को अपने जीवन में शामिल करने से जीवन का मूल्य बढ़ता है और व्यक्ति को शांतिपूर्ण जीवन का अनुभव होता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बच्चों को अच्छे संस्कार देने माता-पिता का सबसे पहले कर्तव्य है, क्योंकि संस्कारों से परिपूर्ण बच्चे ही देश की अमूल्य संपत्ति हैं और समाज की प्रगति केवल ऐसे बच्चों के माध्यम से ही संभव है। इसलिए, अभिभावकों को बचपन से ही बच्चों को नैतिक मूल्यों और शरणाओं के वचनों के महत्व की शिक्षा देनी चाहिए।
कार्यक्रम में आशीर्वाद देते हुए हुडगी निजशरणा अंबीगर चौडय्या मठ के पीठाधीश्वरी पुज्य रजशेखर गुरुजी ने कहा कि 12वीं सदी में हुई विचार क्रान्ति में निजशरणा अंबीगर चौडय्या का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा था। उन्होंने कहा कि उनके वचनों में सामाजिक चिंता, विचारशीलता और जीवन मूल्यों की गहराई है, जिसे हर घर तक पहुंचाने का कार्य निरंतर जारी रहना चाहिए।
गुरुजी ने बताया कि इस उद्देश्य से मठ जिले के हर गांव जाकर लोगों में वचनों के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य लगातार कर रहा है। उन्होंने लोगों के समर्थन और रुचि से मठ को और भी ऊर्जा मिली है और सभी से अपील की है कि वे रोजाना वचनों का पाठ करें और अपने बच्चों को भी वचन पाठ की आदत डालें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता नारायणराव मरकुंडा ने की, जबकि निवृत्त अधिकारी तिप्पण रामपुरे ने संचालन किया। मंच पर मुत्तंगी शंकरराव दास, टोकरे कोली समाज के अध्यक्ष सूर्यकांत कागी, नेताओं अशोक कागी, रमेश बाकी, सूर्यकांत चांगलेला, नागराज नाटिकार, विठल कलोहल, मल्लम्म बनल्लि, शकुंतला मरकुंडा, विठल एमकटी और प्रभाती कागी सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे।
कार्यक्रम में आशीर्वाद देते हुए हुडगी निजशरणा अंबीगर चौडय्या मठ के पीठाधीश्वरी पुज्य रजशेखर गुरुजी ने कहा कि 12वीं सदी में हुई विचार क्रान्ति में निजशरणा अंबीगर चौडय्या का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा था। उन्होंने कहा कि उनके वचनों में सामाजिक चिंता, विचारशीलता और जीवन मूल्यों की गहराई है, जिसे हर घर तक पहुंचाने का कार्य निरंतर जारी रहना चाहिए।
गुरुजी ने बताया कि इस उद्देश्य से मठ जिले के हर गांव जाकर लोगों में वचनों के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य लगातार कर रहा है। उन्होंने लोगों के समर्थन और रुचि से मठ को और भी ऊर्जा मिली है और सभी से अपील की है कि वे रोजाना वचनों का पाठ करें और अपने बच्चों को भी वचन पाठ की आदत डालें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता नारायणराव मरकुंडा ने की, जबकि निवृत्त अधिकारी तिप्पण रामपुरे ने संचालन किया। मंच पर मुत्तंगी शंकरराव दास, टोकरे कोली समाज के अध्यक्ष सूर्यकांत कागी, नेताओं अशोक कागी, रमेश बाकी, सूर्यकांत चांगलेला, नागराज नाटिकार, विठल कलोहल, मल्लम्म बनल्लि, शकुंतला मरकुंडा, विठल एमकटी और प्रभाती कागी सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे।