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16 Oct 2026•
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बीदर में 'प्राणवह भक्ति' पर संगोष्ठी: डॉ. प्रिया एली ने भक्ति के स्वरूप पर प्रकाश डाला
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बीदर में 'प्राणवह भक्ति' पर संगोष्ठी: डॉ. प्रिया एली ने भक्ति के स्वरूप पर प्रकाश डाला

✍️ Reporter: Basavaraj pujari 🗓 16 Oct 2026, 04:04 PM 👁 8
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बीदर के बसवगिरी में 'मरणम् एव महा नवमी महोत्सव' के अवसर पर आयोजित 'प्राणवह भक्ति' संगोष्ठी में विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. प्रिया एली ने कहा कि परमात्मा की प्राणप्रिय आराधना ही सच्ची भक्ति है। उन्होंने बताया कि केवल बाहरी कर्मकांड भक्ति नहीं हैं।

बीदर: विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. प्रिया एली ने कहा है कि परमात्मा की प्राणप्रिय आराधना ही भक्ति है। उन्होंने यह बात यहां बसवगिरी में 'मरणम् एव महा नवमी महोत्सव' के पांचवें दिन गुरुवार को आयोजित 'प्राणवह भक्ति' विषयक संगोष्ठी में कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल स्नान कराना, विभूति लगाना, धूप-दीप आरती करना, फूल-पत्ते चढ़ाकर मंत्र जपना ही भक्ति नहीं है।

डॉ. एली ने आगे कहा कि गुरु द्वारा शास्त्रोक्त दीक्षा दिए जाने पर भी भक्ति शिष्य के भीतर से ही उत्पन्न होनी चाहिए। उन्होंने व्यापारी भक्ति को अनुचित बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईश्वर भक्त के भक्ति सूत्र से दौड़ा चला आता है, परंतु उसके भीतर 'प्राणवह भक्ति' होनी चाहिए। जब आचरण और व्यवहार में भक्ति परिपूर्ण हो तो शरीर ही देवालय बन जाता है, और कर्म में शिव भाव ही 'प्राणवह भक्ति' है।

संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे परुष कट्टे चन्नबसवण्णा ने कहा कि बसवण्णा भक्ति के भंडार थे, जिनकी भक्ति के कारण उस समय विश्व के कोने-कोने से अध्यात्मिक जीव कल्याण की ओर आकर्षित हुए। उन्होंने कहा कि बसवण्णा की भक्ति से उनकी अपनी भक्ति भी प्रदीप्त हुई और वे साधना के शिखर पर पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि संसार दुखों का सागर है और कभी भी पूर्णता प्राप्त नहीं करने देता। कीचड़ में कमल के फूल की तरह खिलकर, भक्ति में लीन होने पर ही सद्गति संभव है।

इस अवसर पर महानंदा मारुति पाटिल ने कहा कि भक्त बनना हो तो बसवण्णा जैसा, जंगम बनना हो तो प्रभु जैसा, जोगी बनना हो तो चन्नबसवण्णा जैसा, योगी बनना हो तो सिद्धराम जैसा, ऐक्य होना हो तो अजगण्णा जैसा और प्रवचनकार बनना हो तो अक्क अन्नपूर्णा ताई जैसा बनना चाहिए। संगोष्ठी में कौशल्यादेवी चोंडी ने सुमधुर वचन गायन किया, जबकि नवदगेरी के नीलमण्णा मंडल की बहनों ने लोकगीत शैली में 'शोभाने पद' और पहेलियाँ प्रस्तुत कर सबका ध्यान आकर्षित किया। 'बेत्तादा मेलोन्दु' समूह नृत्य भी आकर्षक रहा। संगोष्ठी का शुभारंभ महादेवी बीजापुरे ने वचन पाठ से किया। नीलमण्णा मंडल की विजयालक्ष्मी बिरादार ने अध्यक्षता की। इस अवसर पर पार्वती लद्दे, शोभा चळकापुरे भी उपस्थित थीं। विजयालक्ष्मी टेकुरे ने स्वागत किया और गंगम्मा लद्दे ने संचालन किया। अश्विनी शरणप्रकाश मल्लासुरे ने भक्ति दासोह (भोजन सेवा) का प्रबंध किया।
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