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14 Oct 2026•
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🔴Breaking : पिपरई में शासकीय रास्ते पर फसल बोकर किया गया अतिक्रमण, किसान रणवीर विश्वकर्मा ने कलेक्टर से मांगी कार्रवाई

✍️ Reporter: Pranav Gaur 🗓 14 Oct 2026, 08:06 PM 👁 25
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पिपरई के किसान रणवीर विश्वकर्मा का आरोप है कि कुछ लोगों ने उनके खेत तक जाने वाले शासकीय रास्ते पर फसल बोकर उसे बंद कर दिया है, जिससे खेती और घर तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कलेक्टर से जांच और अतिक्रमण हटाने की मांग की है।

पिपरई, 14 अक्टूबर। खेत और मकान तक पहुंचने वाले शासकीय रास्ते पर फसल बो दिए जाने और रास्ते को घेरकर बंद करने का मामला सामने आया है। रास्ता बंद होने से किसान को अपने खेत तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पिपरई निवासी रणवीर विश्वकर्मा ने कलेक्टर को दिए आवेदन में आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उनके खेत तक पहुंचने के लिए निर्धारित शासकीय रास्ते पर फसल की बोनी कर दी है। इसके बाद रास्ते को घेरकर आवागमन भी बाधित कर दिया गया। किसान का कहना है कि रास्ता बंद होने से खेती‑किसानी के जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं और खेत तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।

सर्वे नंबर 558/2 से जुड़ा है मामला। शिकायतकर्ता के अनुसार उनका खेत सर्वे क्रमांक 558/2 में स्थित है और पिपरई‑मुंगावली मुख्य मार्ग से लगा हुआ है। खेत पर उनका मकान भी बना हुआ है। खेत और मकान तक पहुंचने के लिए सर्वे क्रमांक 556, 557 और 558/2 से होकर शासकीय रास्ता निर्धारित होने का उल्लेख आवेदन में किया गया है।

किसान ने आरोप लगाया कि मुन्नवर खान, इसराइल खान और वकील खान, निवासी पिपरई ने उक्त रास्ते पर फसल बोकर उसे अवरुद्ध कर दिया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक रास्ते को लेकर पहले सीमांकन और मौके की जांच भी हो चुकी है। इसके बावजूद रास्ता दोबारा बंद किए जाने से विवाद की स्थिति बनी हुई है।

कृषि कार्य प्रभावित, आर्थिक नुकसान की भी शिकायत। रणवीर विश्वकर्मा का कहना है कि रास्ता बंद होने से उन्हें खेत तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। कृषि कार्य के लिए आवश्यक संसाधन और अन्य सामान खेत तक ले जाना भी मुश्किल हो रहा है। उनका आरोप है कि इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसान ने कलेक्टर से मांग की है कि राजस्व अमले के माध्यम से मौके की जांच कराई जाए, शासकीय रास्ते का दोबारा सीमांकन कराया जाए और यदि अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए रास्ते से अवरोध और फसल हटाकर आवागमन बहाल कराया जाए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर मौके की जांच कर शासकीय रास्ते को लेकर स्थिति कितनी स्पष्ट करता है और किसान को खेत तक सुगम आवागमन की सुविधा कब मिलती है।
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