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गढ़वाल में पहली बार गंजेपन का सरकारी अस्पताल में मुफ्त हेयर ट्रांसप्लांट, बेस अस्पताल श्रीनगर में
गढ़वाल में पहली बार सरकारी अस्पताल में मुफ्त हेयर ट्रांसप्लांट
बेस अस्पताल श्रीनगर में FUE तकनीक से शुरू हुई अत्याधुनिक सुविधा, निजी अस्पतालों में लाखों का खर्च, पहला ट्रांसप्लांट श्रीकोट निवासी अर्जुन का सफल
एम्स से पढ़ीं डॉ. अत्रेयो चक्रवर्ती के संकल्प ने लिया आकार, मरीजों के साथ मेडिकल छात्रों को भी मिलेगी आधुनिक तकनीक सीखने की सुविधा
श्रीनगर। गंजेपन की समस्या से परेशान लोगों के लिए गढ़वाल से बड़ी राहत की खबर है। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल में पहली बार FUE (Follicular Unit Extraction) तकनीक से हेयर ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू कर दी गई है। खास बात यह है कि सरकारी अस्पताल में यह सुविधा मरीजों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। गढ़वाल क्षेत्र में सरकारी चिकित्सा संस्थान के स्तर पर महंगी कॉस्मेटिक प्रक्रिया को मुफ्त उपलब्ध कराने की यह पहल स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बेस अस्पताल के त्वचा रोग विभाग में विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक डिमरी और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अत्रेयो चक्रवर्ती के प्रयासों से यह सेवा शुरू हुई है। सेवा शुरू होने के साथ ही विभाग में पहला हेयर ट्रांसप्लांट श्रीकोट निवासी अर्जुन का किया गया। पहले केस की प्रक्रिया को पूरा करने में चिकित्सकों की टीम को करीब छह से सात घंटे का समय लगा। पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
निजी अस्पतालों में लाखों का खर्च, यहां मुफ्त सुविधा :
हेयर ट्रांसप्लांट को आमतौर पर महंगी कॉस्मेटिक चिकित्सा प्रक्रिया माना जाता है। निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में तकनीक, ग्राफ्ट की संख्या और संस्थान के आधार पर इसका खर्च कई मामलों में डेढ़ लाख से पांच लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकता है। ऐसे में बेस अस्पताल श्रीनगर में यह सुविधा निःशुल्क शुरू होना आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए बड़ी राहत है।
FUE तकनीक से निकाले जाते हैं हेयर ग्राफ्ट:
FUE हेयर ट्रांसप्लांट की आधुनिक तकनीकों में शामिल है। इसमें सिर के उस हिस्से से, जहां बालों की जड़ें मजबूत होती हैं, छोटे-छोटे फॉलिक्युलर यूनिट यानी हेयर ग्राफ्ट निकाले जाते हैं। इसके बाद इन ग्राफ्ट को गंजेपन से प्रभावित हिस्से में प्रत्यारोपित किया जाता है। मरीज की जरूरत और गंजेपन की स्थिति के आधार पर सामान्यतः 1,000 से 5,000 तक ग्राफ्ट लगाए जा सकते हैं। हालांकि प्रत्येक मरीज के लिए ग्राफ्ट की संख्या और उपचार की उपयुक्तता अलग-अलग होती है।
एम्स से निकले डॉक्टर का संकल्प बना मरीजों के लिए वरदान : हेयर ट्रांसप्लांट सेवा शुरू करने के पीछे त्वचा रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अत्रेयो चक्रवर्ती का विशेष संकल्प भी जुड़ा है। उन्होंने बताया कि एम्स से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने यह संकल्प लिया था कि डर्मेटोलॉजी के क्षेत्र में जो उपचार बेहद महंगा है, उसे जरूरतमंद मरीजों के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगी।
राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में सेवा देने का अवसर मिलने के बाद उन्होंने इस संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में कदम बढ़ाया। उनका कहना है कि गंजेपन से परेशान लोग बेस अस्पताल के त्वचा रोग विभाग में संपर्क कर सकते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जांच और डोनर एरिया का आकलन करने के बाद यह तय किया जाएगा कि संबंधित मरीज के लिए हेयर ट्रांसप्लांट उपयुक्त है या नहीं।
बेस अस्पताल श्रीनगर में FUE तकनीक से शुरू हुई अत्याधुनिक सुविधा, निजी अस्पतालों में लाखों का खर्च, पहला ट्रांसप्लांट श्रीकोट निवासी अर्जुन का सफल
एम्स से पढ़ीं डॉ. अत्रेयो चक्रवर्ती के संकल्प ने लिया आकार, मरीजों के साथ मेडिकल छात्रों को भी मिलेगी आधुनिक तकनीक सीखने की सुविधा
श्रीनगर। गंजेपन की समस्या से परेशान लोगों के लिए गढ़वाल से बड़ी राहत की खबर है। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल में पहली बार FUE (Follicular Unit Extraction) तकनीक से हेयर ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू कर दी गई है। खास बात यह है कि सरकारी अस्पताल में यह सुविधा मरीजों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। गढ़वाल क्षेत्र में सरकारी चिकित्सा संस्थान के स्तर पर महंगी कॉस्मेटिक प्रक्रिया को मुफ्त उपलब्ध कराने की यह पहल स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बेस अस्पताल के त्वचा रोग विभाग में विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक डिमरी और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अत्रेयो चक्रवर्ती के प्रयासों से यह सेवा शुरू हुई है। सेवा शुरू होने के साथ ही विभाग में पहला हेयर ट्रांसप्लांट श्रीकोट निवासी अर्जुन का किया गया। पहले केस की प्रक्रिया को पूरा करने में चिकित्सकों की टीम को करीब छह से सात घंटे का समय लगा। पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
निजी अस्पतालों में लाखों का खर्च, यहां मुफ्त सुविधा :
हेयर ट्रांसप्लांट को आमतौर पर महंगी कॉस्मेटिक चिकित्सा प्रक्रिया माना जाता है। निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में तकनीक, ग्राफ्ट की संख्या और संस्थान के आधार पर इसका खर्च कई मामलों में डेढ़ लाख से पांच लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकता है। ऐसे में बेस अस्पताल श्रीनगर में यह सुविधा निःशुल्क शुरू होना आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए बड़ी राहत है।
FUE तकनीक से निकाले जाते हैं हेयर ग्राफ्ट:
FUE हेयर ट्रांसप्लांट की आधुनिक तकनीकों में शामिल है। इसमें सिर के उस हिस्से से, जहां बालों की जड़ें मजबूत होती हैं, छोटे-छोटे फॉलिक्युलर यूनिट यानी हेयर ग्राफ्ट निकाले जाते हैं। इसके बाद इन ग्राफ्ट को गंजेपन से प्रभावित हिस्से में प्रत्यारोपित किया जाता है। मरीज की जरूरत और गंजेपन की स्थिति के आधार पर सामान्यतः 1,000 से 5,000 तक ग्राफ्ट लगाए जा सकते हैं। हालांकि प्रत्येक मरीज के लिए ग्राफ्ट की संख्या और उपचार की उपयुक्तता अलग-अलग होती है।
एम्स से निकले डॉक्टर का संकल्प बना मरीजों के लिए वरदान : हेयर ट्रांसप्लांट सेवा शुरू करने के पीछे त्वचा रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अत्रेयो चक्रवर्ती का विशेष संकल्प भी जुड़ा है। उन्होंने बताया कि एम्स से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने यह संकल्प लिया था कि डर्मेटोलॉजी के क्षेत्र में जो उपचार बेहद महंगा है, उसे जरूरतमंद मरीजों के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगी।
राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में सेवा देने का अवसर मिलने के बाद उन्होंने इस संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में कदम बढ़ाया। उनका कहना है कि गंजेपन से परेशान लोग बेस अस्पताल के त्वचा रोग विभाग में संपर्क कर सकते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जांच और डोनर एरिया का आकलन करने के बाद यह तय किया जाएगा कि संबंधित मरीज के लिए हेयर ट्रांसप्लांट उपयुक्त है या नहीं।